Navrashtra Bharat (74)

दिल्ली, 5 सितंबर 2025: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश और यमुना नदी के बढ़ते जलस्तर ने शहर को संकट में डाल दिया है। यमुना का जलस्तर खतरे के निशान 205.33 मीटर को पार कर 207.48 मीटर तक पहुँच गया है, जिससे निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है। मयूर विहार, कश्मीरी गेट, और दिल्ली सचिवालय जैसे प्रमुख क्षेत्र जलमग्न हो गए हैं, जबकि नेशनल हाईवे-44 (एनएच-44) पर एक फ्लाईओवर का हिस्सा ढहने से यातायात और प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर असर पड़ा है। राहत शिविरों के पानी में डूबने से प्रभावित लोगों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं।

यमुना का बढ़ता जलस्तर और बाढ़ का खतरा

यमुना नदी का जलस्तर 4 सितंबर 2025 को 207.46 मीटर तक पहुँच गया था और 5 सितंबर की सुबह तक यह 207.48 मीटर पर स्थिर रहा। यह स्तर खतरे के निशान से काफी ऊपर है, जिसने दिल्ली के निचले इलाकों में बाढ़ की आशंका को बढ़ा दिया है। पुराने रेलवे ब्रिज पर मापा गया यह जलस्तर पिछले साल के ऐतिहासिक 208.66 मीटर के स्तर की याद दिलाता है। हरियाणा के हथिनीकुंड और वज़ीराबाद बैराज से प्रति घंटे भारी मात्रा में पानी छोड़ा जा रहा है, जिसके कारण यमुना का जलस्तर और बढ़ रहा है।

दिल्ली सचिवालय के पास का अंडरपास पूरी तरह जलमग्न हो गया है, जिसके कारण सचिवालय जाने वाली एक प्रमुख सड़क को बंद करना पड़ा। मयूर विहार फेज-1 और यमुना बाज़ार जैसे क्षेत्रों में पानी घुसने से घरों और दुकानों को भारी नुकसान हुआ है। स्थानीय निवासियों ने बताया कि उनके घरों में 2-3 फीट तक पानी भर गया है, जिससे दैनिक जीवन ठप हो गया है।

एनएच-44 पर फ्लाईओवर का ढहना

नेशनल हाईवे-44 पर अलीपुर के पास एक फ्लाईओवर का हिस्सा 4 सितंबर 2025 को भारी बारिश के कारण ढह गया। इस घटना में एक ऑटो-रिक्शा फँस गया, और चालक को मामूली चोटें आईं। इस ढहने ने दिल्ली की बुनियादी ढांचे की कमज़ोरी को उजागर किया है और जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न होने वाली आपदाओं के लिए शहर की तैयारियों पर सवाल उठाए हैं। भारी बारिश और जलजमाव के कारण सड़कों पर गड्ढे बन गए हैं, जिससे यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ है। मथुरा रोड, कृष्ण मेनन मार्ग, और फिरोज शाह कोटला रोड जैसी प्रमुख सड़कों पर वाहन रेंगते नज़र आए।

राहत शिविरों की बदहाली

बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए बनाए गए राहत शिविरों की स्थिति भी चिंताजनक है। मयूर विहार में जिला मजिस्ट्रेट (पूर्व) द्वारा स्थापित राहत शिविर स्वयं पानी में डूब गए हैं, जिसके कारण विस्थापित परिवारों को दोबारा सुरक्षित स्थानों पर ले जाना पड़ा। स्थानीय निवासी अशोक ने बताया, “ये टेंट बाढ़ से बचाव के लिए लगाए गए थे, लेकिन अब ये भी पानी में हैं। हमें अब और कहीं शरण लेनी पड़ रही है।” इस स्थिति ने प्रशासन की तैयारियों पर सवाल उठाए हैं।

राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) और अन्य एजेंसियाँ यमुना बाज़ार और अन्य प्रभावित क्षेत्रों में बचाव कार्य में जुटी हैं। लगभग 200 परिवारों को श्रीनगर और अन्य निचले इलाकों से निकाला गया है।

मौसम विभाग की चेतावनी

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने दिल्ली में 8 सितंबर तक बारिश और गरज के साथ छींटे पड़ने की चेतावनी जारी की है। 4 सितंबर को पीली और नारंगी चेतावनी जारी की गई थी, और 5 सितंबर को हल्की से मध्यम बारिश की संभावना जताई गई है। अधिकतम तापमान 31-33 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 23-25 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने की उम्मीद है। मौसम विभाग ने लोगों से सतर्क रहने और निचले इलाकों से दूर रहने की सलाह दी है।

प्रशासन का जवाब

दिल्ली के मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण मंत्री परवेश वर्मा ने स्थिति को नियंत्रण में होने का दावा किया है। उन्होंने प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया और राहत कार्यों को तेज करने का आश्वासन दिया। सुक्शन पंपों का उपयोग कर जलजमाव को कम करने की कोशिश की जा रही है, लेकिन लगातार बारिश ने इन प्रयासों को मुश्किल बना दिया है। यमुना बैंक मेट्रो स्टेशन जाने वाली सड़क भी बंद कर दी गई है, जिससे दिल्ली मेट्रो की सेवाएँ प्रभावित हुई हैं।

जनजीवन पर प्रभाव

बाढ़ और जलजमाव ने दिल्ली के जनजीवन को पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है। स्कूलों और कार्यालयों में उपस्थिति कम रही, और कई लोग घरों में फँस गए। यमुना के किनारे बसे मंदिर, जैसे स्वामीनारायण मंदिर, भी आंशिक रूप से जलमग्न हो गए हैं। स्थानीय निवासियों ने प्रशासन से बेहतर जल निकासी व्यवस्था और दीर्घकालिक समाधान की माँग की है।

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