No system to groom political leaders in India; youth must enter public life with awareness: Governor Arlekar
  • May 23, 2026
  • Navrashtra Bharat Desk
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गुवाहाटी। राज्यपाल डॉ. राजेंद्र अरलेकर ने हाल ही में देश में राजनीतिक नेतृत्व के प्रशिक्षण प्रणाली की कमी पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि हमारे पास एक सुसंगठित तंत्र नहीं है जो भावी राजनेताओं को कुशल और सजग बना सके। यह स्पष्ट रूप से एक गंभीर समस्या है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

डॉ. अरलेकर ने युवाओं को सार्वजनिक जीवन में जागरूकता और सजगता के साथ कदम रखने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि बिना समुचित मार्गदर्शन और नेतृत्व विकास के हमारे युवाओं का राजनीतिक क्षेत्र में प्रभावी योगदान देना मुश्किल होगा। उन्होंने सरकार और संबंधित संस्थानों से आग्रह किया कि वे इस दिशा में ठोस कदम उठाएं ताकि देश को बेहतर नेतृत्व मिल सके।

राज्यपाल ने यह भी उल्लेख किया कि राजनीतिक नेताओं को प्रशिक्षित करने वाली संस्थाएं या कार्यक्रम वर्तमान में बहुत कम हैं, और जिनका विस्तार आवश्यक है। उन्होंने कहा, ‘ जहां तक मेरा अनुभव है, हमारे देश में एक सुव्यवस्थित प्रणाली का अभाव है जो राजनीतिक नेताओं को सही दिशा और प्रशिक्षण प्रदान कर सके।’

उन्होंने कहा कि राजनीतिक नेतृत्व के निर्माण में शिक्षा, नैतिकता, जनसेवा की भावना और व्यवहारिक अनुभव को जोड़ना जरूरी है। इसके लिए चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और युवा नेताओं के लिए विशेष पहल की आवश्यकता है।

डॉ. अरलेकर ने कहा, “यदि हम राष्ट्रीय विकास की दिशा में कदम बढ़ाना चाहते हैं तो हमें पहले अपने राजनीतिक नेतृत्व को मजबूत और सक्षम बनाना होगा। इसके लिए एक समर्पित तंत्र की तत्काल आवश्यकता है।”

विशेषज्ञ भी इस मुद्दे पर सहमत हैं कि राजनीतिक नेतृत्व को संवर्धित करने के लिए व्यापक सुधार आवश्यक हैं। उन्होंने कहा कि राजनेताओं का प्रशिक्षण केवल पार्टी स्तर पर ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी होना चाहिए।

इस संदर्भ में विभिन्न शैक्षणिक संस्थान और राजनीतिक विचारक सक्रिय भूमिका निभा सकते हैं। युवा वर्ग को राजनीति में आने के लिए प्रेरित करने के साथ-साथ उन्हें योग्य और जिम्मेदार नागरिक बनाने पर जोर दिया जाना चाहिए।

राज्यपाल अरलेकर के विचार भाजपा के युवा नेताओं और अन्य राजनैतिक दलों के लिए भी एक महत्वपूर्ण संदेश हैं। यह आवश्यक है कि युवा पूरी जानकारी और समझ के साथ जनसेवा के क्षेत्र में कदम रखें और देश की प्रगति में अपना योगदान दें।

अंत में, देश को आवश्यक है कि वह एक ऐसी व्यवस्था बनाए जिसमें राजनीतिक नेता न केवल चुनाव जीतें बल्कि देश के विकास के लिए सतत प्रयास करें और जनता की उम्मीदों पर खरे उतरें। यही हमारी लोकतांत्रिक व्यवस्था की बुनियादी मांग है।

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