Decode Politics: What is Sarkar-e-Khalsa and why BJP is invoking it centuries later
  • June 9, 2026
  • Navrashtra Bharat Desk
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देश की राजनीति में समय-समय पर ऐतिहासिक संदर्भों का उपयोग करना आम बात है, लेकिन हाल ही में भाजपा द्वारा ‘सर्कार-ए-खालसा’ शब्द का पुनः उपयोग किए जाने ने राजनीतिक प्रतिक्रियाओं को जन्म दिया है। यह शब्द सिख इतिहास में एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है, और समझना आवश्यक है कि भाजपा इसे वर्तमान संदर्भ में क्यों जोर दे रही है।

सर्कार-ए-खालसा का ऐतिहासिक परिचय

सर्कार-ए-खालसा शब्द बाना गुरू गोल्ड सिंग जी द्वारा स्थापित सिख शासन व्यवस्था को संदर्भित करता है, जिसे 18वीं सदी के अंत में पंजाब में स्थापित किया गया था। यह हिंदुस्तानी उपमहाद्वीप में एक शक्तिशाली और संगठित सिख राज्य था, जिसने उस दौर में सामाजिक और राजनीतिक स्थिरता कायम की। इसका उद्देश्य केवल राजनीतिक सत्ता से अधिक, धार्मिक और सामाजिक न्याय की स्थापना था।

भाजपा का वर्तमान संदर्भ

भाजपा अब इस ऐतिहासिक संदर्भ का उपयोग एक राजनीतिक संदेश देने के लिए कर रही है। पार्टी का दावा है कि वे एक मजबूत, संगठित और न्यायपूर्ण शासन की ओर अग्रसर हैं, जो सर्कार-ए-खालसा की तरह देश के टिकाऊ विकास और समरसता पर काम करेगा। साथ ही, यह भी माना जाता है कि भाजपा इस शब्द का इस्तेमाल सिख समुदाय के साथ अपनी नजदीकियों को बढ़ाने और संवेदनशील मुद्दों पर उन्हें संबोधित करने के लिए कर रही है।

राजनीतिक विश्लेषक क्या कहते हैं?

  • कई विशेषज्ञों के अनुसार, यह एक रणनीतिक कदम है, जिससे भाजपा अपनी लोकप्रियता बढ़ाना चाहती है।
  • कुछ विश्लेषकों ने इसे भाजपा की धर्मनिरपेक्षता की कोशिशों का एक हिस्सा माना है।
  • दूसरी ओर, विपक्ष इसे केवल चुनावी लाभ के लिए एक राजनीतिक हथकंडा बता रहा है।

समाप्ति

सर्कार-ए-खालसा का भाजपा द्वारा पुनः प्रतिष्ठापन न केवल इतिहास को याद करने जैसा है बल्कि वर्तमान राजनीतिक माहौल में एक नई पहचान बनाने की कोशिश भी है। जब यह प्रयोग कितनी सफल होगी, यह आने वाला वक्त ही बताएगा, लेकिन इतना स्पष्ट है कि इतिहास और राजनीति के इस संगम ने देश की राजनीति में नई बहसों को जन्म दिया है।

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