Navrashtra Bharat (78)

कोच्चि, केरल: केरल कांग्रेस इकाई में ‘बीड़ी-बिहार’ पोस्ट को लेकर उपजे भारी विवाद के बाद, पार्टी के सोशल मीडिया विभाग के प्रमुख ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। यह मामला कांग्रेस सांसद शशि थरूर की उस टिप्पणी से जुड़ा है, जिसे लेकर बिहार के लोगों में गहरा आक्रोश देखा गया था। इस इस्तीफे ने न केवल पार्टी के भीतर चल रहे घमासान को तेज कर दिया है, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी राजनीतिक गलियारों में इसकी चर्चा जोरों पर है।

क्या था ‘बीड़ी-बिहार’ पोस्ट विवाद?

यह विवाद तब शुरू हुआ जब केरल कांग्रेस के सोशल मीडिया हैंडल से एक कार्टून पोस्ट किया गया था। इस कार्टून में कथित तौर पर बिहार के लोगों को ‘बीड़ी’ से जोड़कर उपहास उड़ाया गया था। यह पोस्ट सीधे तौर पर कांग्रेस सांसद शशि थरूर द्वारा दिए गए एक बयान से संबंधित थी, जिसमें उन्होंने कथित तौर पर बिहार के राजनीतिक रुझानों पर टिप्पणी करते हुए ‘बीड़ी’ शब्द का इस्तेमाल किया था। हालांकि थरूर ने बाद में अपने बयान पर स्पष्टीकरण दिया था, लेकिन सोशल मीडिया पोस्ट ने आग में घी डालने का काम किया।

शशि थरूर के बयान पर बवाल

दरअसल, थरूर ने बिहार में हुए राजनीतिक उलटफेर पर टिप्पणी करते हुए एक तुलनात्मक बयान दिया था, जिसे कई लोगों ने बिहार के लोगों के खिलाफ आपत्तिजनक माना। उनके बयान को इस तरह से व्याख्यायित किया गया कि वह बिहारियों को ‘बीड़ी’ से जोड़ रहे हैं, जिससे राज्य के लोगों में व्यापक नाराजगी फैल गई। इस बयान और उसके बाद सोशल मीडिया पोस्ट ने सियासी बवाल खड़ा कर दिया।

विपक्ष की तीखी प्रतिक्रिया और कांग्रेस पर दबाव

इस पोस्ट के वायरल होते ही, बिहार के राजनीतिक दलों, विशेषकर भाजपा और जदयू, ने कांग्रेस और शशि थरूर पर जमकर हमला बोला। उन्होंने इसे बिहार के लोगों का अपमान बताया और कांग्रेस से तत्काल माफी की मांग की। सोशल मीडिया पर भी #BiharInsulted और #ApologiseToBihar जैसे हैशटैग ट्रेंड करने लगे, जिससे कांग्रेस पर दबाव और बढ़ गया। पार्टी के भीतर से भी इस तरह के आपत्तिजनक पोस्ट को लेकर चिंताएं व्यक्त की जाने लगी थीं।

सोशल मीडिया प्रमुख का इस्तीफा: नैतिक जिम्मेदारी या दबाव का नतीजा?

बढ़ते राजनीतिक दबाव और पार्टी की छवि को हो रहे नुकसान को देखते हुए, केरल कांग्रेस के सोशल मीडिया प्रमुख ने अपने पद से इस्तीफा देने का फैसला किया। हालांकि, उन्होंने अपने इस्तीफे को ‘नैतिक जिम्मेदारी’ बताया है, लेकिन सूत्रों का कहना है कि यह पार्टी आलाकमान और राज्य नेतृत्व के बढ़ते दबाव का नतीजा था। पार्टी नहीं चाहती थी कि यह विवाद और गहराए और आगामी चुनावों में उसे इसका खामियाजा भुगतना पड़े।

आगे क्या?

कांग्रेस पार्टी ने इस मामले पर अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि पार्टी किसी भी समुदाय या राज्य के लोगों की भावनाओं को ठेस पहुंचाने का समर्थन नहीं करती है। उन्होंने यह भी कहा कि यह पोस्ट पार्टी के आधिकारिक रुख को प्रतिबिंबित नहीं करता। इस इस्तीफे के बाद, पार्टी सोशल मीडिया रणनीतियों और कंटेट मॉडरेशन पर और अधिक ध्यान दे सकती है ताकि भविष्य में इस तरह के विवादों से बचा जा सके। वहीं, केरल और बिहार की राजनीति में इस मसले पर चर्चा अभी भी जारी है।

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