बजट 2027: अनिश्चितताओं के बीच भारत की ढाल

नौवें बजट में निर्मला सीतारमण का संदेश—लोकल ताकत, वैश्विक झटकों से सुरक्षा

कहा जाता है कि अंक 9 शुभ होता है और अच्छे कार्यों के लिए सुपरहीरो जैसा होता है। कुछ वैसा ही असर दिखा वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के लगातार नौवें बजट में, जो किसी तात्कालिक लोकलुभावन वादों के बजाय, दुनिया भर में फैली आर्थिक-राजनीतिक उथल-पुथल के बीच भारत को मजबूत और आत्मनिर्भर बनाने की ठोस कोशिश करता दिखा।

दुनिया इस वक्त अजीब दौर से गुजर रही है—वैश्विक मंदी की आशंकाएं, भू-राजनीतिक टकराव, युद्ध, महंगाई, ब्याज दरों का दबाव, अस्थिर बाजार, कमजोर मुद्राएं और टूटती सप्लाई चेन। ऐसे माहौल में यह साफ है कि अब व्यापार निष्पक्ष नहीं रहा, बाजार तटस्थ नहीं हैं और आपूर्ति श्रृंखलाएं सत्ता के औजार बन चुकी हैं।

नई दिशा, बिना भीड़-खुश करने वाले वादे

इसी पृष्ठभूमि में बजट 2027 सामने आया, एक साफ संदेश के साथ:
आर्थिक और कूटनीतिक रूप से लचीला बनो, विनिर्माण को मजबूत करो, निर्यात बढ़ाओ, नौकरियां पैदा करो और वैश्विक कर्ज संकट के बीच वित्तीय अनुशासन बनाए रखो।

यह बजट न तो उपहारों की झड़ी है और न ही चुनावी लोकलुभावन घोषणाओं से भरा। यह एक ऐसा बजट है जो स्थिरता को तमाशे से ऊपर रखता है। कुछ फैसले बाजार और करदाताओं को निराश भी कर सकते हैं, लेकिन वित्त मंत्री ने साफ संकेत दिया कि सुख-दुख जीवन का हिस्सा हैं।

कम चर्चित सेक्टर बने नई रणनीति की रीढ़

पहली बार बजट का फोकस उन सेक्टरों पर गया जो लंबे समय से हाशिए पर थे
खनन, वस्त्र, इंजीनियरिंग सामान, रसायन, नवीकरणीय ऊर्जा और भारी उद्योग।
यही सेक्टर अब भारत की नई विनिर्माण और व्यापार रणनीति की रीढ़ बनेंगे, जिससे घरेलू अर्थव्यवस्था मजबूत होगी और बाहरी झटकों का असर कम होगा।

सरकारी पूंजीगत व्यय पहले की तरह आर्थिक ऊर्जा का काम करता रहा।
• सार्वजनिक पूंजीगत व्यय FY26 के ₹11.2 लाख करोड़ से बढ़कर FY27 में ₹12.2 लाख करोड़।
• रक्षा क्षेत्र को भू-राजनीतिक हालात के मद्देनजर बड़ा समर्थन, पूंजीगत आवंटन में करीब 22% की बढ़ोतरी, ₹2.19 लाख करोड़।

हालांकि, आयकर या पूंजीगत लाभ कर में बड़ी राहत की उम्मीद लगाए करदाताओं को इस बार भी खाली हाथ लौटना पड़ा।

बड़ा दिल, लेकिन सख्त हिसाब-किताब

राजकोषीय अनुशासन बजट की आत्मा रहा।
राजकोषीय घाटा FY27 में 4.3% पर तय।
पहली बार Debt-to-GDP अनुपात को नई वित्तीय कसौटी बनाया गया।
लक्ष्य FY31 तक कर्ज-GDP अनुपात 50% और FY27 में 55.6%।

कागज पर आंकड़े संतुलित दिखते हैं, लेकिन वैश्विक अस्थिरता के बीच इन्हें साधना आसान नहीं होगा, निजी निवेश की सुस्ती, रोजगार सृजन की धीमी रफ्तार और पूंजी के बाहर जाने की चुनौती बनी हुई है।

बाजार नाराज़, सरकार अडिग

बजट के दिन बाजारों ने नाराज़गी जताई
सेंसेक्स 1500 अंकों से ज्यादा गिरा, निफ्टी 600 अंकों से नीचे आया।
लेकिन सरकार का नजरिया साफ है: लंबी दौड़ की तैयारी, तात्कालिक तालियों की नहीं।

विनिर्माण, MSME और आत्मनिर्भरता पर जोर

सेमीकंडक्टर मिशन को ₹40,000 करोड़।
बायो-फार्मा को ₹10,000 करोड़।
रेयर अर्थ, खनिज, रसायन और पूंजीगत वस्तुओं में आयात निर्भरता घटाने के लिए विशेष पैकेज।
टेक्सटाइल सेक्टर के लिए मेगा टेक्सटाइल पार्क और हथकरघा कार्यक्रम को मजबूती।
MSME के लिए ₹10,000 करोड़ की इक्विटी सहायता, भविष्य के SME चैंपियन तैयार करने का लक्ष्य।

कर मोर्चे पर उम्मीदें फीकी

करदाताओं की लंबी इच्छा-सूची, STT हटाने से लेकर टैक्स स्लैब में बदलाव तक, पूरी नहीं हुई।
उलटे, फ्यूचर्स-ऑप्शंस पर STT बढ़ा और आय छुपाने पर सख्त दंड का प्रावधान किया गया।

हालांकि कुछ राहत भी मिली
नया आयकर कानून जल्द लागू होगा
विदेश यात्रा, शिक्षा और स्वास्थ्य पर TCS में कटौती
NRI प्रॉपर्टी बिक्री पर TDS हटाया गया
क्लाउड सर्विस देने वाली कंपनियों को 2047 तक टैक्स अवकाश

कल्याण योजनाएं: कम जोश, ज्यादा गणित

कृषि, स्वास्थ्य, शिक्षा और ग्रामीण विकास में आवंटन सीमित रहे। विशेषज्ञ लंबे समय से मांग कर रहे हैं कि स्वास्थ्य खर्च GDP के 2.5% और शिक्षा 6% तक पहुंचे, लेकिन बिना नए कर उपायों के सरकार ने सतर्क रुख अपनाया।

स्पष्ट संदेश

बजट 2027 कोई चमक-दमक वाला बजट नहीं है।
यह एक रक्षात्मक लेकिन दूरदर्शी बजट है, जो कहता है कि भारत अब वैश्विक हालात के भरोसे नहीं बैठेगा, बल्कि मजबूत घरेलू अर्थव्यवस्था, सुरक्षित सीमाएं और सशक्त उद्योग खड़े करेगा।

यह समृद्धि की तलाश में चारों दिशाओं में भटकने का बजट नहीं,
बल्कि खतरों से भरी दुनिया में टिके रहने की रणनीति है।

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