पटना: बिहार की सियासत में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री पशुपति कुमार पारस ने शनिवार को महागठबंधन (RJD-कांग्रेस-लेफ्ट गठबंधन) में शामिल होने की घोषणा कर दी। इस कदम को आगामी विधानसभा और लोकसभा उपचुनावों से पहले विपक्षी खेमे की बड़ी मजबूती माना जा रहा है।
महागठबंधन में नई ऊर्जा
महागठबंधन नेताओं ने पशुपति पारस का स्वागत करते हुए कहा कि उनके आने से गठबंधन की जड़ें ग्रामीण और दलित वोटबैंक तक और मजबूत होंगी। पारस लंबे समय से अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर विचार कर रहे थे। माना जा रहा है कि बीजेपी से बढ़ती दूरी और एनडीए में घटती भूमिका को देखते हुए उन्होंने यह फैसला लिया है।
हेमंत सोरेन भी देंगे सहयोग
झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के नेता और पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भी ऐलान किया है कि उनकी पार्टी बिहार में राजद और कांग्रेस के साथ मिलकर चुनावी मैदान में उतरेगी। सोरेन का कहना है कि “बिहार और झारखंड की राजनीति ऐतिहासिक रूप से एक-दूसरे से जुड़ी रही है। हम महागठबंधन के सहयोग से बीजेपी के खिलाफ एक मजबूत विकल्प पेश करेंगे।”
राजनीतिक समीकरणों पर असर
विशेषज्ञों का मानना है कि पारस के जुड़ने से महागठबंधन को दलित वोटरों के बड़े हिस्से तक पहुंच बनाने में मदद मिलेगी। वहीं, हेमंत सोरेन के जुड़ने से झारखंड-बिहार की साझा राजनीतिक और सामाजिक ताकत भी महागठबंधन के पक्ष में जाएगी।
दूसरी ओर, बीजेपी खेमे के लिए यह झटका माना जा रहा है, क्योंकि पारस अब तक एनडीए का हिस्सा रहे थे।
आने वाले चुनाव में बदलेंगे समीकरण
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि इन नए घटनाक्रमों से बिहार के चुनावी समीकरण में बड़ा बदलाव होगा। विपक्ष अब एकजुट होकर बीजेपी-जेडीयू गठबंधन को चुनौती देने की तैयारी में है।
महागठबंधन की इस रणनीतिक बढ़त से बिहार की सियासत में आगामी चुनावी जंग और भी दिलचस्प हो गई है।



















































































































































































































































































































































