Sarthak Sidhant flags CBSE OSM tender irregularities before Parliamentary panel
  • June 3, 2026
  • Navrashtra Bharat Desk
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झारखंड के 17 वर्षीय विद्यार्थी सार्थक सिद्धांत ने हाल ही में संसद के शिक्षा स्थायी समिति के समक्ष केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की ओएसएम टेंडर प्रक्रिया में आईं अनियमितताओं को लेकर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की। इस दौरान, CBSE के अधिकारीयों ने प्रक्रिया की पुष्टि करते हुए सुधारात्मक कदम उठाने का वादा किया।

सार्थक सिद्धांत ने समिति को बताया कि टेंडर प्रक्रिया में पारदर्शिता और नियमों का सख्ती से पालन जरूरी है। उन्होंने अपने तथ्यों और सबूतों के आधार पर कहा कि कुछ अनुचित कदम उठाए गए जिनसे शिक्षा प्रणाली पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। इस रिपोर्ट को समिति ने गंभीरता से लिया और संबंधित पक्ष से जवाब मांगा।

बताया गया कि CBSE ने शुरुआत में टेंडर प्रक्रिया की नियमितता पर बल दिया, लेकिन समिति के सवालों के बाद बोर्ड ने अपने नियमों एवं ऑन-द-ग्राउंड क्रियान्वयन की समीक्षा करने का आश्वासन दिया। सीबीएसई के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “हम शिक्षा के क्षेत्र में पारदर्शिता एवं गुणवत्ता में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहते। यदि कहीं कोई त्रुटि है तो उसे सुधारा जाएगा।”

शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामले शिक्षा के क्षेत्र में अच्छे प्रशासन और नीति निर्माण के लिए महत्वपूर्ण संकेत देते हैं। इससे यह स्पष्ट होता है कि युवा पीढ़ी भी अपनी समझ और जिम्मेदारी के साथ समाज की उन्नति में योगदान देने को तत्पर है।

सार्थक के इस पहल ने न केवल शिक्षा विभाग की प्रक्रियाओं की जांच को प्रेरित किया है, बल्कि पूरे देश में शिक्षा क्षेत्र में बेहतर प्रशासन के लिए जागरूकता भी बढ़ाई है। वहीं, शिक्षकों और अभिभावकों के बीच भी पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग और मजबूत हुई है।

इस घटना से यह भी स्पष्ट होता है कि सरकार के विभिन्न विभागों में निरंतर निगरानी और सुधार की आवश्यकता है ताकि देश के विद्यार्थियों को सुचारू और निष्पक्ष शिक्षा प्रणाली मिल सके। सार्थक सिद्धांत के योगदान को स्थानीय प्रशासन ने भी सराहा है और आने वाले समय में युवा प्रतिभाओं को ज्यादा मंच प्रदान करने पर जोर दिया गया है।

अंततः, यह मामला केवल एक टेंडर की अनियमितता तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समग्र शिक्षा प्रणाली में सशक्त निगरानी, सुधार और युवा सशक्तिकरण की जरूरत को दर्शाता है। शिक्षा मंत्रालय और CBSE इसके बाद भी इस दिशा में ठोस कदम उठाएंगे, ऐसे आशय समिति ने व्यक्त किए हैं।

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