कोलकाता: पश्चिम बंगाल बीजेपी के प्रवक्ता देबजीत सरकार ने ममता बनर्जी पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि वे निजी अस्पताल को डायमंड हार्बर सांसद अभिषेक बनर्जी को भर्ती कराने के लिए दबाव बना रही थीं। इस संदर्भ में उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक ऑडियो क्लिप भी साझा की है, जिसमें ममता बनर्जी अस्पताल के प्रबंधन की अनिच्छा पर गुस्सा जताती हुई सुनी जा सकती हैं।
इस ट्वीट के माध्यम से बीजेपी ने यह दावा किया है कि ममता बनर्जी ने अस्पताल को अभिषेक बनर्जी को अस्पताल में भर्ती करने के लिए मजबूर किया। ऑडियो क्लिप में ममता को अस्पताल अधिकारियों से नाराजगी जाहिर करते हुए सुना गया, जो आरोपों की पुष्टि करता माना जा रहा है।
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) अध्यक्ष ममता बनर्जी ने अभी तक इस मामले में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। वहीं, विपक्षी दल बीजेपी ने इस मामले को लेकर मुख्यमंत्री पर गंभीर सवाल उठाए हैं और इसे चुनावी माहौल को प्रभावित करने वाले राजनीतिक हथकंडे के रूप में देखा जा रहा है।
विश्लेषकों का कहना है कि इस आरोप के बाद राजनीतिक समीकरण और भी जटिल हो सकते हैं, क्योंकि स्वास्थ्य सेवाओं और राजनीतिक हस्तक्षेप को लेकर पहले भी कई बार विवाद सामने आ चुके हैं। बीजेपी का आरोप है कि इस मामले में ममता ने निजी अस्पताल के फैसले पर दबाव बनाने का गलत उपयोग किया, जो कि सरकारी तंत्र और प्रशासन के सही कार्यकलाप के खिलाफ है।
डायमंड हार्बर से टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी की स्वास्थ्य संबंधी स्थिति को लेकर पहले भी कई बार अस्पताल में भर्ती की खबरें सामने आई थीं। ऐसे में यह नया आरोप राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है।
इस विवाद के बीच, स्वास्थ्य विभाग ने इस मामले की जांच कराने की घोषणा की है। प्रदेश के प्रशासनिक अफसरों को इस बात की जांच करने को कहा गया है कि क्या अस्पताल पर किसी प्रकार का दबाव बनाया गया था और क्या अस्पताल ने उचित प्रक्रिया का पालन किया।
वहीं, विपक्षी दलों ने इस मामले को लेकर सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से सफाई मांगनी शुरू कर दी है। भाजपा के अनुसार, इस तरह के आरोपों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए ताकि स्वास्थ्य सेवाओं में पारदर्शिता बनी रहे और किसी भी प्रकार की अनियमितता को रोका जा सके।
इस पूरे विवाद को लेकर राजनीतिक माहौल गरमा गया है और आगामी दिनों में इस मामले में और खुलासे हो सकते हैं। स्वास्थ्य सेवाओं में हस्तक्षेप और राजनीतिक दबाव को लेकर सार्वजनिक बहस तेज होने की संभावना है।






























































































































































































































































































































































