‘Himanta Sarma critical factor’: Sushmita Dev on Trinamool exit decision
  • June 12, 2026
  • Navrashtra Bharat Desk
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नई दिल्ली। पूर्व लोकसभा सदस्य सुश्मिता देव ने हाल ही में अपने राजनीतिक करियर में एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस छोड़कर तृणमूल कांग्रेस में शामिल होने का फैसला लिया था, जो अब अचानक बदल गया है। उन्होंने तृणमूल से अपने इस फैसले पर पुनर्विचार करते हुए पार्टी छोड़ने की घोषणा की है। इस निर्णय के पीछे असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा को एक महत्वपूर्ण कारक बताया जा रहा है।

सुश्मिता देव ने मीडिया से बातचीत में कहा कि हिमंता सरमा की राजनीतिक रणनीतियाँ और उनकी नीतिगत प्राथमिकताएं उनके फैसले पर गहरा प्रभाव डाल रही हैं। उन्होंने कहा कि असम में सरमा के उदार और प्रगतिशील नजरिए ने उन्हें प्रभावित किया, लेकिन हाल के राजनीतिक घटनाक्रमों से ऐसा प्रतीत होता है कि उनकी सोच और पार्टी की दिशा में अंतर है।

इससे पहले, सुश्मिता देव कांग्रेस की एक प्रमुख नेता रह चुकी हैं और उन्होंने पार्टी के लिए कई वेक्तिगत व क्षेत्रीय मुद्दों पर आवाज उठाई है। उनकी ट्रिनामूल में शामिल होने की खबर राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बनी थी, क्योंकि यह कदम पश्चिम बंगाल की प्रमुख विपक्षी पार्टी के लिए एक बड़ी सफलता माना गया था।

हालांकि, अब उन्होंने ट्रिनामूल से अलग होने का जो निर्णय लिया है, उससे स्पष्ट है कि पार्टी में अपना स्थान सुरक्षित करना और अपने विचारों को प्रभावी ढंग से पेश करना उनके लिए चुनौतीपूर्ण हो गया है। उन्होंने यह भी कहा कि आने वाले दिनों में वे अपनी राजनीतिक यात्रा के अगले चरण पर ध्यान केंद्रित करेंगी और जनता की सेवा में अपनी भूमिका निभाएंगी।

विश्लेषक मानते हैं कि सुश्मिता देव का यह रुख भारतीय राजनीति में विपक्षी दलों के अंदर विभाजन की एक नई कहानी प्रस्तुत करता है। वर्तमान समय में सभी राजनीतिक दल अपने-अपने मतभेदों और सशक्तिकरण की कोशिशों में व्यस्त हैं, और ऐसे में एक प्रमुख नेता का पार्टी से अलग होना निश्चित रूप से राजनीतिक परिदृश्य को प्रभावित करेगा।

सरकार और विपक्ष के बीच चल रही तगड़ी राजनीतिक लड़ाई के बीच इस तरह के निर्णयों का न केवल केंद्र की राजनीति पर असर होता है, बल्कि राज्य स्तर पर भी इन राजनीतिक बदलावों के उतार-चढ़ाव देखे जा सकते हैं। इसलिए सुश्मिता देव के इस निर्णय को राजनीतिक पर्यवेक्षक बड़ी गंभीरता से देख रहे हैं।

अंततः राजनीतिक समर में यह देखना रोचक होगा कि सुश्मिता देव किस दिशा में कदम बढ़ाती हैं और भविष्य में उनकी राजनीतिक छवि कैसे आकार लेती है। इस बीच, हिमंता बिस्वा सरमा की केंद्रीय भूमिका और उनके राजनीतिक इष्टतम निर्णय भारतीय राजनीति के लिए निरंतर चर्चा का विषय बने रहेंगे।

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