सांप्रदायिक हिंसा और असंतुलित जनसंख्या वाले इलाकों में संपत्ति की खरीद-फरोख्त पर होगी पाबंदी, किरायेदारों के अधिकारों की होगी सुरक्षा
नई दिल्ली: राजस्थान की कैबिनेट ने बुधवार को एक महत्वपूर्ण विधेयक के मसौदे को मंजूरी दी है, जिसका नाम है “दी राजस्थान प्रॉहिबिटेशन ऑफ ट्रांसफर ऑफ इमूवेबल प्रॉपर्टी एंड प्रोटेक्शन ऑफ टेनेंट्स फ्रॉम एविक्शन फ्रॉम प्रिमाइसेज इन डिस्टर्ब्ड एरियाज बिल-2026”। इस कानून के लागू होने के बाद सरकार को अधिकार होगा कि वह कुछ इलाकों को ‘अशांत क्षेत्र’ घोषित कर सके। इसका मकसद उन क्षेत्रों में लोगों को मजबूरी में अपनी संपत्ति कम कीमत पर बेचने से रोकना और किरायेदारों के अधिकारों की रक्षा करना है। विधेयक को विधानसभा के आगामी बजट सत्र में पेश किया जाएगा।
सरकार की ओर से बयान
कानून एवं संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल ने कहा कि जिन इलाकों में हिंसा, भीड़-तोड़-फोड़ या किसी समुदाय की जनसंख्या में असंतुलन देखा जाएगा, उन्हें अशांत क्षेत्र घोषित किया जा सकेगा। ऐसे क्षेत्रों में जिलाधिकारी की अनुमति के बिना किसी भी अचल संपत्ति का लेन-देन अमान्य होगा।
मंत्री ने कहा कि कुछ क्षेत्रों में एक विशेष समुदाय की संख्या अत्यधिक तेजी से बढ़ रही है, जिससे जनसंख्या संतुलन बिगड़ रहा है और सामाजिक सौहार्द प्रभावित हो रहा है। ऐसे इलाकों में रहने वाले लोग अक्सर अपनी संपत्ति कम कीमत पर बेचने के लिए मजबूर होते हैं। विधेयक में ऐसे मामलों को गंभीर अपराध माना गया है, जिसके तहत आरोप साबित होने पर तीन से पांच साल की सजा और आर्थिक दंड का प्रावधान है।
विधेयक के मुख्य बिंदु
- जिन इलाकों में जनसंख्या संतुलन बिगड़ रहा हो या कानून-व्यवस्था खतरे में हो, उन्हें अशांत क्षेत्र घोषित किया जा सकेगा।
- अशांत क्षेत्र घोषित होने पर जिलाधिकारी की अनुमति के बिना संपत्ति का लेन-देन अवैध होगा।
- कानून का उल्लंघन संज्ञेय और गैर जमानती अपराध होगा।
- आरोप सिद्ध होने पर तीन से पांच साल की जेल और जुर्माने की सजा हो सकती है।
- अलग-अलग समुदायों के बीच संपत्ति लेन-देन के लिए अनुमति अनिवार्य होगी, जबकि एक ही समुदाय के भीतर लेन-देन पर यह नियम लागू नहीं होगा।
विरोधी दलों की प्रतिक्रिया
राजस्थान कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने इसे बीजेपी की सत्ता बनाए रखने की रणनीति बताते हुए कहा कि यह कानून डर का माहौल बनाने और नौकरशाही को असीमित अधिकार देने का प्रयास है। उनका कहना है कि विधेयक गुजरात मॉडल पर आधारित है और राजस्थान जैसे शांत राज्य को अस्थिर करने की कोशिश है।
वहीं उद्योग और रियल एस्टेट विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि इस कानून के लागू होने से जयपुर और अन्य शहरों में भूमि और मकान के कारोबार, रोजगार और व्यापार पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।































































































































































































































































































































