Navrashtra Bharat (24)
  • December 31, 2024
  • Navrashtra Bharat Desk
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मणिपुर हिंसा को लेकर मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह ने राज्य की जनता से heartfelt माफी मांगी है। उन्होंने इसे राज्य के इतिहास का बेहद दुखद और कठिन समय बताया। मुख्यमंत्री ने स्वीकार किया कि वर्ष 2023 मणिपुर के लिए अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण साबित हुआ है। उन्होंने कहा, “मैं पूरे दिल से मणिपुर की जनता से माफी मांगता हूं। 3 मई 2023 से लेकर अब तक जो भी घटनाएं घटीं, उनसे मैं बेहद आहत हूं और खेद प्रकट करता हूं।”

मणिपुर के हालात: एक दर्दभरी दास्तां

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि इस हिंसा ने न केवल कई परिवारों को तोड़ा, बल्कि कई लोगों को अपने प्रियजनों को खोने का गम भी दिया। हजारों परिवार अपने घरों को छोड़कर पलायन करने पर मजबूर हो गए। उन्होंने कहा, “इस मानवीय त्रासदी ने राज्य की सामाजिक संरचना को गहरी चोट पहुंचाई है। मैं इस दर्द को समझता हूं और राज्य के हर व्यक्ति से अपील करता हूं कि वे शांति और भाईचारे की दिशा में आगे बढ़ें।”

नए साल की उम्मीद: शांति और पुनर्निर्माण

मुख्यमंत्री ने कहा कि बीते 3-4 महीनों में शांति की दिशा में कुछ प्रगति हुई है, जो नए साल 2025 में मणिपुर के लिए एक नई शुरुआत का संकेत है। उन्होंने कहा, “जो हुआ उसे बदला नहीं जा सकता, लेकिन हमें अपने अतीत की गलतियों को भुलाकर एक नई शुरुआत करनी होगी। सभी समुदायों को मिलकर एक शांतिपूर्ण और समृद्ध मणिपुर के निर्माण की दिशा में काम करना चाहिए।”

हिंसा के आंकड़े और सरकार की कार्रवाई

मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि इस हिंसा में अब तक लगभग 200 लोगों की जान गई है। पुलिस ने 12,247 एफआईआर दर्ज की हैं और 625 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। इस दौरान सुरक्षा बलों ने 5,600 से अधिक हथियार और करीब 35,000 गोला-बारूद जब्त किए हैं। उन्होंने यह भी बताया कि केंद्र सरकार ने विस्थापित परिवारों के पुनर्वास के लिए पर्याप्त सुरक्षा और धनराशि उपलब्ध कराई है। इसके तहत विस्थापितों के लिए नए घरों का निर्माण कराया जा रहा है।

मुख्यमंत्री का संदेश: एकता और सह-अस्तित्व की अपील

मुख्यमंत्री ने सभी समुदायों से अपील की कि वे भूतकाल की कड़वाहट को भुलाकर आगे बढ़ें। उन्होंने कहा, “हमें एकजुट होकर एक शांतिपूर्ण, समृद्ध और समावेशी मणिपुर का निर्माण करना है। हर नागरिक का योगदान इसमें अहम होगा।”

मुख्यमंत्री के इस बयान से राज्य में शांति और सौहार्द की उम्मीदें बढ़ गई हैं। सरकार और जनता के बीच सामंजस्य से ही यह संकटपूर्ण दौर समाप्त हो सकता है।

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