पूर्व सेना प्रमुख की अप्रकाशित किताब के हवाले पर सत्ता पक्ष का विरोध, सदन दिनभर के लिए स्थगित
नई दिल्ली: लोकसभा में सोमवार को भारी हंगामे के चलते कार्यवाही दिनभर के लिए स्थगित करनी पड़ी। विपक्ष के नेता राहुल गांधी के भाषण के दौरान सत्ता पक्ष की लगातार टोका-टोकी और नारेबाजी के कारण पहले सदन को दो बार स्थगित किया गया और अंततः पूरे दिन के लिए कार्यवाही रोक दी गई।
यह विवाद उस समय शुरू हुआ जब राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव की चर्चा के दौरान राहुल गांधी ने पूर्व सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे की एक अप्रकाशित आत्मकथा का हवाला दिया। इस पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और गृह मंत्री अमित शाह ने कड़ा ऐतराज जताया।
अप्रकाशित सामग्री के हवाले पर आपत्ति
राजनाथ सिंह ने कहा कि सदन के पटल पर अप्रकाशित सामग्री का उल्लेख संसदीय परंपराओं के खिलाफ है। गृह मंत्री अमित शाह ने भी इस आपत्ति का समर्थन करते हुए कहा कि केवल आधिकारिक रूप से प्रकाशित स्रोतों का ही हवाला दिया जाना चाहिए।
अमित शाह ने कहा, “पत्रिकाएं कुछ भी छाप सकती हैं, ऐसी सामग्री को संसद के रिकॉर्ड का हिस्सा नहीं बनाया जा सकता।”
इन आपत्तियों के बाद सदन में शोर-शराबा बढ़ गया। विपक्ष ने सत्ता पक्ष पर बहस दबाने का आरोप लगाया, जबकि सत्ता पक्ष ने नियमों के उल्लंघन की बात कही।
बार-बार स्थगन, फिर पूरे दिन के लिए कार्यवाही बंद
लगातार हंगामे के चलते पहले लोकसभा की कार्यवाही दोपहर 3 बजे तक स्थगित की गई, फिर 4 बजे तक रोक लगाई गई। इसके बाद भी स्थिति नहीं संभली और अंततः सदन को पूरे दिन के लिए स्थगित कर दिया गया।
किरण रिजिजू का पलटवार
केंद्रीय मंत्री किरण रिजिजू ने कहा कि स्पीकर के आदेश के बावजूद राहुल गांधी ने अध्यक्ष के निर्देशों का पालन नहीं किया, जो संसदीय इतिहास में अभूतपूर्व है।
उन्होंने कहा, “अध्यक्ष के आदेश की अवहेलना कर राहुल गांधी ने अपने पद की गरिमा को ठेस पहुंचाई है।”
रिजिजू ने आगे कहा कि राहुल गांधी को भारत-चीन सीमा मुद्दे पर बोलने का नैतिक अधिकार नहीं है। उन्होंने दावा किया कि आज भारत की हर इंच जमीन सुरक्षित है और कांग्रेस शासन के दौरान देश ने बड़े भूभाग गंवाए थे।
उन्होंने कांग्रेस से अतीत में जमीन खोने के लिए देश से माफी मांगने की भी बात कही।
कांग्रेस का आरोप: सरकार सच से डरती है
कांग्रेस सांसद मणिकम टैगोर ने आरोप लगाया कि सरकार राहुल गांधी को बोलने नहीं देना चाहती क्योंकि “सच सामने आ चुका है।”
उन्होंने 31 अगस्त 2020 की लद्दाख की रेजिन ला घटना का हवाला देते हुए दावा किया कि उस रात चीनी टैंक और सैनिक भारतीय ठिकानों के बेहद करीब पहुंच गए थे।
टैगोर के मुताबिक, तत्कालीन सेना प्रमुख ने राजनीतिक नेतृत्व से दिशा-निर्देश मांगे, लेकिन लंबे समय तक स्पष्ट आदेश नहीं मिला। उन्होंने आरोप लगाया कि यह राजनीतिक निर्णय लेने में खतरनाक देरी थी और नेतृत्व की कमजोरी को दर्शाती है।
राहुल गांधी का बचाव, अखिलेश यादव का समर्थन
राहुल गांधी ने अपने बयान का बचाव करते हुए कहा कि उन्होंने जिस स्रोत का उल्लेख किया, वह प्रामाणिक है और जनरल नरवणे की आत्मकथा पर आधारित है।
समाजवादी पार्टी के सांसद अखिलेश यादव ने भी राहुल गांधी का समर्थन किया और कहा कि चीन जैसे संवेदनशील मुद्दे पर गंभीर चर्चा जरूरी है।
अखिलेश यादव ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति से जुड़े सवाल उठाने पर विपक्ष के नेता को रोका नहीं जाना चाहिए।
प्रधानमंत्री की मौजूदगी में बढ़ा हंगामा
इस पूरे घटनाक्रम के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सदन में मौजूद थे। दोनों पक्षों की ओर से नारेबाजी और बाधाओं के बीच राहुल गांधी अपना भाषण जारी रखते रहे, जिससे स्थिति और तनावपूर्ण हो गई।










































































































































































































































































































































