भारत सरकार ने 5 सितंबर 2025 को जीएसटी (वस्तु एवं सेवा कर) स्लैब में व्यापक बदलावों की घोषणा की है, जिसका उद्देश्य आम जनता को आर्थिक राहत प्रदान करना और त्योहारी सीजन से पहले उपभोक्ताओं के लिए आवश्यक वस्तुओं को सस्ता करना है। इस ऐतिहासिक फैसले के तहत दूध, पनीर, दवाइयाँ, और बीमा पॉलिसी जैसी रोज़मर्रा की आवश्यक वस्तुओं पर जीएसटी दर को शून्य या न्यूनतम स्तर तक कम कर दिया गया है। नए स्लैब 0%, 5%, 18%, और 40% के होंगे, जो भारत की कर प्रणाली में एक नया अध्याय जोड़ते हैं।
नए जीएसटी स्लैब का विवरण
नए जीएसटी ढांचे के तहत, सरकार ने चार स्लैब निर्धारित किए हैं, जो पहले के जटिल स्लैब सिस्टम को सरल और उपभोक्ता-अनुकूल बनाने की दिशा में एक कदम है। इन स्लैब का विवरण निम्नलिखित है:
- 0% स्लैब: दूध, ताज़ा सब्जियाँ, गेहूँ, चावल, दाल, और बिना ब्रांड वाली खाद्य सामग्री जैसी बुनियादी आवश्यक वस्तुओं को कर-मुक्त कर दिया गया है। इसके अलावा, स्वास्थ्य सेवाएँ, शिक्षा, और कुछ बुनियादी दवाइयाँ भी इस श्रेणी में शामिल हैं।
- 5% स्लैब: पनीर, मक्खन, पैकेज्ड खाद्य पदार्थ (जैसे ब्रेड, बिस्किट), और छोटे व्यवसायों द्वारा बेचे जाने वाले कपड़े इस श्रेणी में आएंगे। इस स्लैब का उद्देश्य छोटे और मध्यम व्यापारियों को राहत देना भी है।
- 18% स्लैब: इलेक्ट्रॉनिक्स, रेस्तरां सेवाएँ, और मध्यम स्तर की सेवाएँ इस श्रेणी में शामिल हैं। इस स्लैब में कोई बड़ा बदलाव नहीं किया गया है, लेकिन कुछ वस्तुओं को 28% से घटाकर 18% किया गया है।
- 40% स्लैब: लग्जरी वस्तुएँ जैसे महँगी कारें, आभूषण, और तंबाकू उत्पाद इस स्लैब के अंतर्गत आएंगे। यह स्लैब उच्च आय वर्ग को लक्षित करता है और राजस्व संग्रह को बढ़ाने में मदद करेगा।
बीमा पॉलिसी पर जीएसटी में कमी
एक बड़ा बदलाव बीमा पॉलिसी पर जीएसटी दर में कटौती के रूप में सामने आया है। पहले स्वास्थ्य और जीवन बीमा पॉलिसी पर 18% जीएसटी लगता था, जिसे अब घटाकर 5% कर दिया गया है। इससे बीमा प्रीमियम सस्ता होगा, जिसके परिणामस्वरूप अधिक लोग बीमा योजनाओं का लाभ उठा सकेंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देगा और मध्यम वर्ग को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करेगा।
आम जनता पर प्रभाव
नए जीएसटी स्लैब के लागू होने से रोज़मर्रा की वस्तुओं की कीमतों में कमी आएगी, जिसका सीधा लाभ मध्यम और निम्न आय वर्ग को होगा। उदाहरण के लिए:
- दूध और दूध से बने उत्पाद जैसे पनीर और दही अब सस्ते होंगे, जिससे परिवारों का मासिक बजट कम होगा।
- दवाइयों पर जीएसटी शून्य होने से स्वास्थ्य सेवाएँ और सस्ती हो जाएँगी, विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में।
- त्योहारी सीजन से पहले यह बदलाव उपभोक्ताओं के लिए एक उपहार की तरह है, क्योंकि खाद्य पदार्थों और कपड़ों की खरीदारी सस्ती होगी।
व्यापार और अर्थव्यवस्था पर प्रभाव
जीएसटी स्लैब में बदलाव का असर केवल उपभोक्ताओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यह व्यापार और अर्थव्यवस्था पर भी सकारात्मक प्रभाव डालेगा। छोटे और मध्यम उद्यमों (SMEs) को 5% स्लैब के तहत राहत मिलेगी, जिससे उनकी लागत कम होगी और वे अधिक प्रतिस्पर्धी बन सकेंगे। इसके अलावा, कर-मुक्त वस्तुओं की सूची बढ़ने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा, क्योंकि ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी खाद्य पदार्थों की माँग अधिक होती है।
हालाँकि, 40% स्लैब की शुरूआत से सरकार का राजस्व बढ़ने की उम्मीद है, क्योंकि यह स्लैब लग्जरी और गैर-आवश्यक वस्तुओं पर केंद्रित है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह संतुलित दृष्टिकोण भारत की अर्थव्यवस्था को मज़बूती प्रदान करेगा।
सरकार और विपक्ष की प्रतिक्रिया
वित्त मंत्री ने इस बदलाव को “जन-केंद्रित” करार दिया है और कहा कि यह कदम आम जनता को महँगाई से राहत देगा। दूसरी ओर, विपक्ष ने इस कदम को “चुनावी स्टंट” बताते हुए सरकार पर निशाना साधा है। विपक्ष का कहना है कि जीएसटी स्लैब को और सरल करने की ज़रूरत थी, और कुछ वस्तुओं पर अभी भी कर का बोझ अधिक है।




























































































































































































































































































































