माघ मेले में स्नान विवाद से शुरू हुआ मामला असली-नकली संत और सनातन धर्म की बहस तक पहुँचा
प्रयागराज: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ‘कालनेमी’ वाले बयान पर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। शंकराचार्य ने कहा कि अब देश की जनता समझ चुकी है कि “कालनेमी कौन है।” उन्होंने यह भी कहा कि वे किसी प्रकार का सुख नहीं भोग रहे हैं, जबकि मुख्यमंत्री सत्ता की गद्दी पर बैठे हैं। यह विवाद माघ मेले में स्नान को लेकर शुरू हुआ, जो धीरे-धीरे असली-नकली संत और सनातन धर्म से जुड़ी बहस में बदल गया है। शंकराचार्य मौनी अमावस्या से ही संगम तट पर धरने पर बैठे हैं और उन्होंने बसंत पंचमी पर स्नान न करने का निर्णय लिया है।
‘मेरे साथ अपराध हुआ, उसका संज्ञान लिया जाए’
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने मुख्यमंत्री के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि बयानबाज़ी से समस्या का समाधान नहीं होगा। उनका आरोप है कि उनके साथ अन्याय हुआ है और प्रशासन को उस अपराध का संज्ञान लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि नोटिस के पीछे दुर्भावना झलकती है और अधिकारी मुख्यमंत्री को गलत दिशा में ले जा रहे हैं। शंकराचार्य ने यह भी कहा कि वर्षों से सत्ता में रहते हुए भी सरकार कई गंभीर समस्याओं पर नियंत्रण नहीं कर पाई है, इसलिए जवाबदेही तय होनी चाहिए।
मेला प्रशासन के रवैये पर नाराज़गी
शंकराचार्य ने मेला प्रशासन के व्यवहार पर असंतोष जताते हुए कहा कि वे पिछले चार दशकों से माघ मेले में आते रहे हैं। पहले संतों को शिविर की सुविधा दी जाती थी, अब उन्हें फुटपाथ पर बैठने के लिए मजबूर किया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल कुछ पुलिसकर्मियों के निलंबन से वे संतुष्ट नहीं होंगे, बल्कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
नोटिस और प्रशासनिक कार्रवाई
यह विवाद 18 जनवरी को उस समय बढ़ा, जब मौनी अमावस्या के दिन स्नान के दौरान शंकराचार्य की पालकी को रोक दिया गया। इसके बाद मेला प्रशासन ने उनसे पहचान से जुड़े दस्तावेज मांगे और नोटिस जारी किया। दूसरे नोटिस में बैरियर तोड़ने और भीड़ में बग्घी ले जाने के आरोप लगाए गए। नोटिस में यह भी चेतावनी दी गई कि संतोषजनक जवाब न मिलने पर माघ मेले से प्रतिबंध और सुविधाएं वापस ली जा सकती हैं।
मुख्यमंत्री का ‘कालनेमी’ संदर्भ
इससे पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संतों के आचरण और धर्म को लेकर कहा था कि एक संन्यासी के लिए धर्म और राष्ट्र सर्वोपरि होते हैं। उन्होंने चेतावनी दी थी कि कुछ लोग धर्म की आड़ में सनातन धर्म को कमजोर करने की साजिश कर सकते हैं, ऐसे ‘कालनेमी’ तत्वों से सतर्क रहने की आवश्यकता है।
डिप्टी सीएम की अपील
इस बीच उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने शंकराचार्य से स्नान करने और विवाद को समाप्त करने की अपील की। उन्होंने कहा कि शंकराचार्य के प्रति सभी के मन में सम्मान है और यह मामला संवाद से सुलझाया जाना चाहिए।










































































































































































































































































































































