Cloud Seeding: दिल्ली की दमघोंटू हवा से राहत दिलाने के लिए अब सरकार ने आसमान से बारिश की मदद लेने का फैसला किया है। सितंबर में राजधानी में पहली बार क्लाउड सीडिंग यानी कृत्रिम बारिश का प्रयोग किया जाएगा। यह एक वैज्ञानिक तकनीक है, जिसमें बादलों में रसायन मिलाकर कृत्रिम रूप से बारिश कराई जाती है, ताकि वायु प्रदूषण को घटाया जा सके। अगर यह प्रयास सफल रहा, तो यह दिल्ली की जहरीली हवा से लड़ने में एक बड़ा बदलाव साबित हो सकता है।
क्या है क्लाउड सीडिंग?
क्लाउड सीडिंग एक वैज्ञानिक प्रक्रिया है जिसमें विमान के जरिए बादलों में ऐसे रसायन (जैसे सोडियम क्लोराइड या अन्य एरोसोल कण) छोड़े जाते हैं, जो बारिश की संभावना को बढ़ाते हैं। इससे कृत्रिम रूप से वर्षा कराकर वायु प्रदूषकों को जमीन पर गिराया जा सकता है।
कहां और कैसे होगा ये प्रयोग?
दिल्ली सरकार की इस पायलट परियोजना को IIT-कानपुर की एयरोस्पेस इंजीनियरिंग टीम अंजाम देगी। 3.21 करोड़ रुपये की मंजूरी वाली इस योजना में विशेष सेसना 206-H विमान का उपयोग होगा, जिसमें क्लाउड सीडिंग के सभी जरूरी उपकरण लगे होंगे। यह विमान दिल्ली के प्रदूषण-प्रभावित क्षेत्रों जैसे रोहिणी, बवाना, अलीपुर, बुराड़ी और यूपी के कुछ हिस्सों में उड़ान भरेगा और बादलों में सीडिंग करेगा।
क्यों हुआ था परीक्षण में विलंब?
यह प्रयोग जुलाई में होना था, लेकिन मौसम की अनुकूलता न होने के कारण इसे सितंबर तक टालना पड़ा। मौसम विभाग और अन्य संस्थानों से सलाह लेकर अब इसे पीछे हटते मानसून के समय किया जाएगा, जब बादलों की संरचना वर्षा के लिए अधिक अनुकूल होती है।
क्या कहा मंत्री ने?
पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने बताया कि सभी तकनीकी तैयारियां पूरी हो चुकी हैं, और DGCA से भी अनुमति मिल गई है। सरकार ने आश्वासन दिया है कि उड़ानों के दौरान सभी सुरक्षा उपायों और दिशानिर्देशों का पूरी तरह पालन होगा।
दिल्ली की हवा को मिलेगा नया जीवन?
सरकार का मानना है कि अगर यह प्रयोग सफल रहा, तो यह दिल्ली की गंभीर वायु प्रदूषण समस्या से निपटने में क्रांतिकारी कदम होगा, विशेषकर उन महीनों में जब स्मॉग का स्तर खतरनाक हो जाता है।
क्लाउड सीडिंग की यह पहल राजधानी को साफ-सुथरी और सांस लेने लायक हवा देने की दिशा में एक उम्मीद की किरण बनकर उभर रही है। अगर सितंबर के ये परीक्षण सफल होते हैं, तो दिल्ली में प्रदूषण के खिलाफ लड़ाई में एक बड़ा मोड़ आ सकता है।










































































































































































































































































































































