बांग्लादेश में बीएनपी की ऐतिहासिक जीत

भारत से संबंधों पर कहा—विदेश नीति का निर्धारण देश और जनता के हित में होगा

ढाका: बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के अध्यक्ष और संभावित प्रधानमंत्री तारिक रहमान ने आम चुनावों में प्रचंड जीत के बाद स्पष्ट किया है कि उनकी सरकार की प्राथमिकता केवल बांग्लादेश और उसके नागरिकों के हित होंगे। भारत के साथ संबंधों को लेकर पूछे गए प्रश्न पर उन्होंने कहा कि विदेश नीति का निर्धारण पूरी तरह राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखकर किया जाएगा।

गुरुवार को हुए आम चुनावों में बीएनपी गठबंधन को भारी बहुमत मिला। शुक्रवार को आयोजित प्रेस वार्ता में रहमान ने इस विजय को लोकतंत्र के लिए संघर्ष करने वाले लोगों को समर्पित किया। उन्होंने कहा,
“यह जीत बांग्लादेश की है, यह लोकतंत्र की है और उन लोगों की है जिन्होंने लोकतंत्र के लिए त्याग किया।”

नई सरकार के सामने बड़ी चुनौतियां

तारिक रहमान ने स्वीकार किया कि उनकी सरकार को गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि देश एक कमजोर अर्थव्यवस्था, संवैधानिक संस्थाओं की गिरती स्थिति और कानून-व्यवस्था की अव्यवस्था जैसी समस्याओं से जूझ रहा है। उनके अनुसार, पूर्ववर्ती सत्तावादी शासन की विरासत ने इन हालातों को और जटिल बना दिया है।

उन्होंने कहा,
“हमने देश में लोकतंत्र की स्थापना का मार्ग प्रशस्त किया है। अब हमें आर्थिक स्थिरता और संस्थागत मजबूती की दिशा में आगे बढ़ना होगा।”

भारत से संबंधों पर स्पष्ट रुख

भारत के साथ संबंधों को सुधारने के प्रश्न पर रहमान ने कहा,
“हमने अपनी विदेश नीति के बारे में स्पष्ट कर दिया है कि बांग्लादेश और उसके लोगों का हित सर्वोपरि है। इन्हीं हितों की रक्षा करते हुए हम अपने अंतरराष्ट्रीय संबंधों का निर्धारण करेंगे।”

चुनावी परिणाम और राजनीतिक परिदृश्य

चुनाव परिणामों के अनुसार बीएनपी गठबंधन ने 212 सीटें जीतकर स्पष्ट बहुमत प्राप्त किया। यह चुनाव वर्ष 2024 में छात्र-नेतृत्व वाले जनआंदोलन के बाद पहली बार आयोजित हुआ, जिसमें तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना को सत्ता से हटना पड़ा था। जमात-ए-इस्लामी और नेशनल सिटिजन पार्टी सहित अन्य दलों के गठबंधन को 77 सीटें मिलीं। अवामी लीग को इस बार चुनाव में भाग लेने की अनुमति नहीं दी गई।

रहमान ने राजनीतिक दलों से मतभेद भुलाकर राष्ट्रीय एकता बनाए रखने का आह्वान किया। उन्होंने कहा,
“हमारे रास्ते और विचार भिन्न हो सकते हैं, किंतु देशहित में हमें एकजुट रहना होगा। राष्ट्रीय एकता हमारी शक्ति है, जबकि विभाजन हमारी कमजोरी।”

निर्वासन से सत्ता तक का सफर

60 वर्षीय तारिक रहमान का यह राजनीतिक पुनरुत्थान उल्लेखनीय है। वे 17 वर्षों के निर्वासन के बाद पिछले दिसंबर में ब्रिटेन से स्वदेश लौटे थे। उनके पिता जियाउर रहमान की 1981 में हत्या कर दी गई थी, जबकि उनकी माता खालिदा जिया तीन बार प्रधानमंत्री रहीं और दशकों तक राष्ट्रीय राजनीति की प्रमुख हस्ती बनी रहीं।

बीएनपी की यह जीत बांग्लादेश की राजनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत मानी जा रही है, जहां नई सरकार से लोकतांत्रिक मूल्यों और आर्थिक सुधारों को मजबूती देने की अपेक्षा की जा रही है।

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