दलाई लामा को ग्रैमी अवॉर्ड,

स्पोकन-वर्ड ऑडियोबुक ‘मेडिटेशन्स’ ने 68वें ग्रैमी में रचा इतिहास

तिब्बती आध्यात्मिक गुरु परम पावन दलाई लामा ने 68वें ग्रैमी अवॉर्ड्स में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। उनकी स्पोकन-वर्ड ऑडियोबुक ‘Meditations: The Reflections of His Holiness the Dalai Lama’ को सर्वश्रेष्ठ स्पोकन-वर्ड एल्बम का ग्रैमी पुरस्कार मिला, जिसने संगीत और आध्यात्मिक चेतना के बीच एक अनोखा सेतु रच दिया।

इस श्रेणी में दलाई लामा की यह रचना कई चर्चित नामों पर भारी पड़ी। नामांकितों में अमेरिका की सुप्रीम कोर्ट जस्टिस केतनजी ब्राउन जैक्सन, कॉमेडियन ट्रेवर नोआ, अभिनेत्री कैथी गार्वर और पॉप बैंड मिल्ली वैनिली से जुड़े फैब मोरवान जैसे प्रतिष्ठित नाम शामिल थे।

मंच पर नहीं पहुंचे दलाई लामा, प्रतिनिधि ने लिया पुरस्कार

दलाई लामा स्वयं पुरस्कार समारोह में मौजूद नहीं थे। उनकी ओर से प्रसिद्ध गायक और गीतकार रुफस वेनराइट ने यह सम्मान स्वीकार किया। अपने हल्के-फुल्के अंदाज़ में उन्होंने मंच से कहा, “मैं दलाई लामा नहीं हूं,” जिस पर सभागार ठहाकों से गूंज उठा।

संगीत और साधना का अनोखा संगम

इस ऑडियोबुक में दलाई लामा ने भारत के महान सरोद वादक उस्ताद अमजद अली खान और उनके पुत्रों अमान अली बांगश व अयान अली बांगश के साथ सहयोग किया है। एल्बम में ध्यानपूर्ण शब्दों और शास्त्रीय संगीत का ऐसा संगम है, जो शांति, करुणा, दया, आशा और मानवीय एकता के सार्वभौमिक मूल्यों को उजागर करता है।

ग्रैमी जीत पर दलाई लामा का संदेश

ग्रैमी जीत के बाद जारी अपने संदेश में दलाई लामा ने कहा,
“मैं इस सम्मान को कृतज्ञता और विनम्रता के साथ स्वीकार करता हूं। इसे मैं व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं मानता, बल्कि हमारी साझा वैश्विक जिम्मेदारी की मान्यता के रूप में देखता हूं। मुझे गहरा विश्वास है कि शांति, करुणा, पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता और मानवता की एकता की समझ, आठ अरब लोगों की सामूहिक भलाई के लिए अत्यंत आवश्यक है। मुझे खुशी है कि यह ग्रैमी सम्मान इन संदेशों को और व्यापक रूप से फैलाने में सहायक होगा।”

पहली बार ग्रैमी जीतने वालों की सूची में नाम

इस वर्ष दलाई लामा उन हस्तियों में शामिल हो गए, जिन्होंने पहली बार ग्रैमी पुरस्कार जीता है। इस सूची में के-पॉप कलाकारों के साथ-साथ प्रसिद्ध फिल्म निर्माता स्टीवन स्पीलबर्ग जैसे दिग्गज नाम भी शामिल हैं।

यह ग्रैमी जीत सिर्फ एक पुरस्कार नहीं, बल्कि इस बात का प्रमाण है कि आध्यात्मिक विचार और मानवीय मूल्य भी वैश्विक मंच पर उतनी ही गूंज रखते हैं, जितनी संगीत और सिनेमा।

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