नई दिल्ली: स्टील प्रभार संस्था स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (SAIL) के नवनियुक्त अध्यक्ष अशोक पांडा ने हाल ही में यह स्पष्ट किया है कि पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष का कंपनी की स्टील कीमतों पर केवल मामूली प्रभाव पड़ेगा। उन्होंने बताया कि कंपनी कच्चे माल की खरीद में विविधता बनाए रख रही है, जिससे संभावित बाजार उतार-चढ़ाव से बचा जा सके।
अशोक पांडा ने कहा कि SAIL मुख्य रूप से अपने कच्चे माल में डुबई से चूना पत्थर खरीदती है। यह सुनिश्चित करता है कि कंपनी के उत्पादन में कोई बड़ी बाधा न आए। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि कंपनी भारत के भीतर और अंतरराष्ट्रीय बाजारों से भी कच्चे माल जुटाने के विकल्प तलाश रही है, जिससे भंडार सुनिश्चित किया जा सके।
पश्चिम एशिया संघर्ष के कारण वैश्विक ऊर्जा और कच्चे माल की कीमतों में अस्थिरता आई है, लेकिन SAIL ने इस स्थिति को नियंत्रित करने के लिए रणनीतिक कदम उठाए हैं। कंपनी के अंदरूनी आंकड़ों के अनुसार, फिलहाल स्टील उत्पादों की कीमतों पर इस संघर्ष का केवल सीमित और अस्थायी असर पड़ा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में जारी अस्थिरता किसी भी तरह से उत्पादन लागत को प्रभावित कर सकती है, लेकिन SAIL की आपूर्ति श्रृंखला की मजबूती और विविधता इसकी कीमतों को संतुलित बनाए रखने में मददगार साबित होगी।
अशोक पांडा ने आगे कहा, “हमारी प्राथमिकता कच्चे माल की निरंतर और समय पर आपूर्ति सुनिश्चित करना है ताकि उत्पादन गुणवत्ता बनी रहे और उपभोक्ताओं को बेहतरीन उत्पाद मिल सकें। इसके लिए हम अपनी खरीद नीतियों में लचीलापन और नवाचार लाने की दिशा में काम कर रहे हैं।”
देश की प्रमुख स्टील निर्माता कंपनी के भरोसेमंद कच्चे माल स्रोतों के कारण, घरेलू बाजार में स्टील की उपलब्धता और कीमतों का संतुलन कायम रहने की उम्मीद है। सरकार की समर्थन नीतियों और वैश्विक आर्थिक परिस्थिति पर भी अब नजरें टिकी हैं ताकि बाजार में स्थिरता बनी रहे।
इस प्रकार, पश्चिम एशिया के विवाद के बावजूद SAIL की रणनीतिगत प्रबंधन एवं कच्चे माल के विविध स्रोतों ने कंपनी को चुनौतियों का सामना करते हुए मूल्य स्थिरता बनाए रखने में सक्षम बनाया है।






















































