नई दिल्ली, 27 अप्रैल: भारत और यूनाइटेड किंगडम (यू.के.) ने पिछले साल अक्टूबर में एक महत्वपूर्ण पहल की घोषणा की थी, जिसके तहत दोनों देशों ने ‘क्रिटिकल मटीरियल्स ग्लोबल सप्लाई चेन ऑब्जर्वेटरी’ की स्थापना की है। इस वेधशाला का उद्देश्य खनिज आपूर्ति श्रृंखला को और मजबूती देना, तकनीकी नवाचारों को एकीकृत करना तथा दोनों देशों के बीच सहयोग को बढ़ावा देना है।
यह वेधशाला संवेदनशील और रणनीतिक खनिजों जैसे लिथियम, कोबाल्ट, निकल, और दुर्लभ पृथ्वी तत्वों के वैश्विक रिसोर्स मैपिंग और डेटा विश्लेषण में सहायता करेगी। इन खनिजों की मांग इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों, हरित तकनीकों और रक्षा उपकरणों में तेजी से बढ़ रही है, इसलिए उनकी स्थिर और विश्वसनीय आपूर्ति अतिआवश्यक है।
भारत और यू.के. के अधिकारियों ने कहा है कि इस पहल से दोनों देशों के बीच बेहतर साझेदारी होगी, जिससे न केवल खनिजों की आपूर्ति में पारदर्शिता बढ़ेगी, बल्कि टेक्नोलॉजी ट्रांसफर के जरिये उत्पादन क्षमताओं का भी विकास होगा। वेधशाला में कृत्रिम बुद्धिमत्ता, बड़े डेटा विश्लेषण, जियोस्पैशियल तकनीकों और क्लाउड कंप्यूटिंग जैसी अत्याधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया जाएगा।
विशेषज्ञों के मुताबिक, इस तरह की पहल वैश्विक सप्लाई चेन में आने वाली बाधाओं को कम करने में मददगार साबित होगी। कोविड-19 महामारी के बाद विश्वसनीय आपूर्ति के महत्व को समझते हुए भारत और यू.के. ने इस परियोजना को अपनी प्राथमिकता में रखा है।
इसके अंतर्गत दोनों देश सहकारी अनुसंधान, तकनीकी प्रशिक्षण, नीतिगत समन्वय और बाजार में स्थिरता बनाए रखने के लिए साझा रणनीतियाँ बनाएंगे। इससे न केवल दोनों राष्ट्रों की आर्थिक सुरक्षा मजबूत होगी बल्कि विश्व स्तर पर भी प्रबंधन दक्षता में सुधार संभव होगा।
भारत सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, “यह वेधशाला भारत के मिनरल सेक्टर में तकनीकी प्रगति को गति देगी और हमारे खनिज भंडारों के सतत विकास के लिए एक मजबूत आधार तैयार करेगी।”
यह नवाचारपूर्ण सहयोग दोनों देशों के लिए आर्थिक विकास के नए द्वार खोलेगा और साथ ही पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी सकारात्मक कदम साबित होगा। भविष्य में इसे और अधिक देशों के साथ जोड़ने की योजना भी बन रही है, जिससे वैश्विक स्तर पर संवेदनशील खनिज आपूर्ति की विश्वसनीयता बढ़ सके।






























































