Overseas travel spending by Indians falls to $1.09 billion in March

नई दिल्ली: वैश्विक महामारी के बाद विदेशी यात्राओं में कमी के कारण भारतीय नागरिकों द्वारा विदेश यात्राओं पर होने वाला खर्च मार्च महीने में घटकर 1.09 अरब डॉलर हो गया है। यह प्रवृत्ति विदेशी मुद्रा निकासी में कमी का संकेत देती है, जिससे भारतीय रुपये की गिरावट को संभालने में मदद मिल सकती है।

आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि विदेशी यात्राओं में कमी से विदेशी मुद्रा निकासी सीमित होती है, जिससे देश की मुद्रा पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। विदेशी जाने वाले भारतीय पहले की तुलना में कम यात्रा कर रहे हैं, जिसका मुख्य कारण यात्रा प्रतिबंध, कोविड-19 के बाद की अनिश्चितताएं और आर्थिक दबाव हैं।

विदेश यात्री सामान्यतः मुद्रा विनिमय के लिए विदेशी मुद्रा का उपयोग करते हैं, जिससे देश की विदेशी मुद्रा भंडार पर प्रभार बढ़ता है। मार्च में विदेशी यात्रा खर्च में कमी का अर्थ है कि विदेशी मुद्रा की मांग घट रही है, जो रुपये को स्थिर बनाए रखने में सहायक हो सकती है।

डाटा के अनुसार, पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष मार्च में विदेशी यात्रा व्यय में लगभग 15% की गिरावट देखी गई है। विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि यह ऋतु विशेष के कारण हो सकता है, लेकिन इस दिशा में लगातार प्रवृत्ति रुपये के लिए सकारात्मक संकेत है।

सरकारी अधिकारियों ने भी इस बदलाव को स्वागत योग्य बताया है। एक वरिष्ठ अर्थशास्त्री ने कहा, “विदेश यात्रा खर्च में कमी विदेशी मुद्रा के संरक्षण में मदद कर सकती है। इससे भारतीय रिज़र्व बैंक को रुपये की स्थिति सुधारने का अवसर मिलता है।” इसके साथ ही यह घरेलू पर्यटन को बढ़ावा देने का भी संकेत है, जो अर्थव्यवस्था के लिए लाभकारी है।

हालांकि, विशेषज्ञ यह भी आगाह करते हैं कि विदेश यात्रा पर पूर्ण प्रतिबंध या अत्यधिक कमी से पर्यटन, शिक्षा, व्यापार जैसे क्षेत्रों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। इसलिए, नीति निर्धारण में संतुलन बनाए रखना आवश्यक है।

इस प्रकार, विदेशी यात्रा खर्च में कमी वर्तमान में आर्थिक दृष्टि से फायदेमंद साबित हो रही है, लेकिन साथ ही यह आवश्यक है कि आगे भी विदेशी मुद्रा और रुपये की स्थिति पर नजर रखी जाए। सरकार और वित्तीय संस्थान समय-समय पर इन रुझानों का विश्लेषण कर उपयुक्त कदम उठाते रहेंगे।

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