India's Russian oil imports rise in May as refiners boost purchases

नई दिल्ली। मई महीने में भारत के कुल कच्चे तेल का आयात मात्र में 8% का मासिक वृद्धि दर्ज की गई है। इसके पीछे एक प्रमुख कारण मई में रूसी तेल के आयात में 21% की वृद्धि होना है, जो खासतौर पर रिफाइनर कंपनियों की बढ़ती खरीदारी का परिणाम है। इस जानकारी की पुष्टि ऊर्जा क्षेत्र की शोध संस्था CREA (कंस्यूमर रिसोर्स एनालिसिस एंड एनर्जी एसोसिएशन) ने की है।

CREA की रिपोर्ट के अनुसार, मई 2024 में भारत ने अपने कच्चे तेल के आयात में उल्लेखनीय वृद्धि की है, जो घरेलू रिफाइनिंग गतिविधियों में तेजी और आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने की कोशिशों का संकेत है। रूसी तेल की बढ़ती खरीद के कारण तेल की कुल मात्रा में सुधार देखने को मिला है।

रूसी तेल की बढ़ती मांग को पीछे की कई वजहें हैं, जिनमें रूस से मिलने वाली किफायती कीमतें और अन्य देशों की तुलना में स्थिर आपूर्ति शामिल हैं। भारत की रिफाइनर कंपनियां कोविड-19 महामारी के बाद बढ़ती घरेलू और वैश्विक मांग को पूरा करने के लिए अधिक मात्रा में कच्चा तेल खरीद रही हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि रूस से भारतीय आयात में यह सुधार रणनीतिक दृष्टिकोण के तहत भी है, ताकि तेल के स्रोतों में विविधता लाई जा सके और कीमतों में प्रभावी नियंत्रण हासिल किया जा सके। मई में डब्ल्यूटीआई और ब्रेंट क्रूड के दामों में बढ़ोत्तरी के बावजूद, भारतीय कंपनियों ने रूसी तेल की ओर झुकाव बढ़ाया है जो किफायती विकल्प माना जा रहा है।

CREA की रिपोर्ट में आगे यह भी बताया गया है कि भारत का कुल कच्चे तेल आयात इस साल की पहली छमाही में और बढ़ने की संभावना है, खासकर तब जब वैश्विक बाजार में तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव बना रहेगा। सरकार भी घरेलू ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने और ईंधन की उपलब्धता सुनिश्चित करने की रणनीतियों पर काम कर रही है।

इस बढ़ोतरी से भारतीय अर्थव्यवस्था को अतिरिक्त ऊर्जा संसाधन उपलब्ध होंगे, जो विकास दर को समर्थन देने में सहायक होंगे। हालांकि, विशेषज्ञ इस बात पर भी विचार कर रहे हैं कि रूस के साथ बढ़ते व्यापारिक संबंधों के साथ वैश्विक राजनीतिक स्थिरता को किन चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।

कुल मिलाकर, मई 2024 में भारत के रूसी तेल के आयात में यह 21% की वृद्धि ऊर्जा बाजार में बड़ी गतिविधियों और रणनीतिक बदलावों का प्रतीक है। यह कदम भारतीय रिफाइनर कंपनियों को कच्चे माल की बेहतर आपूर्ति सुनिश्चित करने और पेट्रोलियम उत्पादों की मांग को पूरा करने में मदद करेगा।

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