श्रम और उद्योग मंत्रालय द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, इंडेक्स ऑफ इंडस्ट्रीयल प्रोडक्शन (IIP) की वृद्धि दर में उल्लेखनीय कमी आई है। नए अपडेट के तहत IIP का आधार वर्ष 2011-12 से बदलकर 2022-23 कर दिया गया है, जिससे सूचकांक गणना के लिए उपयोग किए जाने वाले उत्पादों की नई सूची तैयार की गई है।
नए आधार वर्ष पर तैयार किए गए IIP के बास्केट में कुल 1,042 उत्पाद शामिल हैं, जिन्हें 463 अलग-अलग आइटम समूहों में वर्गीकृत किया गया है। इस बास्केट में सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा विनिर्माण क्षेत्र का है, जो कुल IIP का लगभग 75% भाग है। वर्तमान डेटा से यह पता चला है कि इस विनिर्माण क्षेत्र के छह प्रमुख उद्योगों में उत्पादन मात्रा में गिरावट आई है, जिससे कुल वृद्धि दर प्रभावित हुई है।
खनन गतिविधि में भी गिरावट आई है, जो कि अब तक की तुलना में विश्वसनीय संकेत देती है कि प्राकृतिक संसाधनों की निकासी के क्षेत्र में मंदी आई है। इस वजह से कुल औद्योगिक उत्पादन में वृद्धि दर समाप्त दर 4.9% तक सिमट गई है, जो कि पिछले कुछ महीनों की तुलना में काफी कम है।
विशेषज्ञों का मानना है कि नई गणना विधि ने आईआईपी की वास्तविक तस्वीर को बेहतर तरीके से प्रस्तुत किया है। इससे नीति निर्धारकों और निवेशकों को इसके सही अर्थ समझने में मदद मिलेगी। इसके अतिरिक्त, आर्थिक विश्लेषकों ने सुझाव दिया है कि विनिर्माण क्षेत्र के कुछ प्रमुख उद्योगों में सुधार के लिए सरकारी और निजी क्षेत्र मिलकर योजनाएं बनाएं।
विभिन्न उद्योगों में निरंतर धीमी आर्थिक गतिविधि का प्रभाव उत्पादन क्षेत्र पर पड़ा है, जिसमें खास तौर पर खनन क्षेत्र के घटने से जुड़ी चिंताएं बढ़ी हैं। इस बदलाव के कारण सरकार को उत्पादन क्षेत्र में सुधार लाने के लिए विशेष कदम उठाने की आवश्यकता है, ताकि आर्थिक विकास की गति पुनः सुचारू हो सके।
कुल मिलाकर, नए आधार वर्ष और अधिक व्यापक उत्पाद सूची के साथ IIP की गणना में हुई यह समीक्षा भारत की आर्थिक स्थिति का एक सटीक चित्र प्रस्तुत करती है, जिसमें खनन और विनिर्माण क्षेत्र की नकारात्मक प्रवृत्ति अब विशेष ध्यान का विषय बन गई है। आने वाले महीनों में बढ़ती हुई उत्पादन मंदी की चुनौतियों से निपटने के लिए रणनीतिक कदम आवश्यक होंगे।



























































