Explained: Reliance Communications and Telegram’s ‘global’ blocking

इंटरनेट की गैर-रोकथाम वाली दुनिया में तकनीकी खामियाँ कभी-कभी बड़ी समस्याओं को जन्म दे देती हैं। हाल ही में, बीजीपी (बॉर्डर गेटवे प्रोटोकॉल) में हुई एक तकनीकी चूक ने टेलीग्राम को कई देशों में अवरुद्ध कर दिया, जिससे उपयोगकर्ताओं में भारी परेशानी हुई। यह रिपोर्ट बीजीपी क्या है, कैसे इसका प्रयोग होता है और यह समस्या आखिर क्यों और कहाँ हुई, इस पर विस्तार से प्रकाश डालती है।

बीजीपी क्या है?

बीजीपी इंटरनेट का एक मुख्य प्रोटोकॉल है जो एसीओ (ऑटोनोमस सिस्टम) यानी इंटरनेट नेटवर्क की सीमाओं को जोड़ता है। इसका काम विभिन्न नेटवर्कों के बीच ट्रैफिक का सबसे अच्छा एवं उचित मार्ग निर्धारित करना होता है। इसे इंटरनेट की “मेल मैन” भी कहा जा सकता है क्योंकि यह सुनिश्चित करता है कि डेटा सही रास्ते से सही गंतव्य तक पहुंचे।

कैसे हुआ टेलीग्राम का अनचाहा ब्लॉक?

रिलायंस कम्युनिकेशंस ने गलती से एक बीजीपी घोषणापत्र (रूट) जारी कर दिया, जिसमें उसने टेलीग्राम सर्वर के लिए गलत मार्ग घोषित किया। इससे दुनिया के कई हिस्सों में इंटरनेट सेवा प्रदाताओं के राउटरों ने उस गलत मार्ग को मान लिया और टेलीग्राम का ट्रैफिक उसी दिशा में जाने लगा। परिणामस्वरूप, टेलीग्राम अस्थायी तौर पर कई देशों में ब्लॉक हो गया।

यह समस्या क्यों नहीं फैली हर जगह?

बीजीपी प्रोटोकॉल का एक विशेषता है कि हर नेटवर्क स्वतंत्र रूप से रूट्स को स्वीकार या अस्वीकार कर सकता है। कई इंटरनेट सेवा प्रदाताओं ने या तो उस गलत मार्ग को स्वीकार नहीं किया या अपने नेटवर्क पर फ़िल्टरिंग लागू की। इस कारण यह समस्या विश्वव्यापी नहीं बनी। इसके अलावा, कुछ नेटवर्क के पास बीजीपी रूट्स को जल्दी से अपडेट करने या सुधारने की क्षमता भी थी, जिससे ब्लॉकिंग जल्दी दूर हो गई।

निष्कर्ष

इस घटना ने इंटरनेट के भौतिक ढांचे के महत्व को स्पष्ट किया है। बीजीपी एक शक्तिशाली लेकिन संवेदनशील प्रोटोकॉल है जिसमें गलती से भी विश्व स्तर पर व्यापक प्रभाव पड़ सकते हैं। इसके लिए इंटरनेट सेवा प्रदाताओं द्वारा सावधानी और बेहतर नियंत्रण की आवश्यकता है। टेलीग्राम की ब्लॉकिंग इस बात का सबक है कि तकनीकी बुनियादी ढांचे को और मजबूत और सुरक्षित बनाया जाना चाहिए ताकि इस प्रकार की समस्या दोबारा न हो।

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