नई दिल्ली: पेट्रोलियम मंत्रालय ने पुष्टि की है कि प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (PMUY) के लाभार्थी सालाना लगभग चार से पाँच LPG सिलेंडरों का उपयोग करते हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार ने योजना के तहत सब्सिडी प्राप्त LPG सिलेंडरों की संख्या को 9 से घटाकर 4 कर दिया है। यह बदलाव सरकारी संसाधनों के बेहतर प्रबंधन और सब्सिडी के दुरुपयोग को रोकने के उद्देश्य से किया गया है।
प्रधानमंत्री उर्जा योजना के तहत अब तक करीब 10.55 करोड़ गैस कनेक्शन वितरित किए जा चुके हैं। यह योजना विशेष रूप से कमजोर और मध्यम वर्गीय परिवारों को स्वच्छ ईंधन मुहैया कराने के लिए शुरू की गई थी। योजना की शुरुआत के बाद से कई परिवारों को पारंपरिक ठोस ईंधन से LPG पर स्विच करने का मौका मिला है, जिससे स्वास्थ्य और पर्यावरण दोनों में सुधार हुआ है।
पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार, लगभग 85 फीसदी लाभार्थी सालाना 4 से 5 सिलेंडरों का ही उपभोग करते हैं। इस आधार पर सरकार ने सब्सिडी काउंटर को सीमित किया है। इससे न केवल पैट्रोलियम पदार्थों की बचत होगी, बल्कि सब्सिडी के दुरुपयोग पर भी रोक लगेगी। मंत्रालय के अधिकारियों ने कहा कि इससे योजना की वित्तीय स्थिरता बनाए रखने में मदद मिलेगी।
विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम उज्ज्वला योजना को दीर्घकालीन आधार पर और भी मजबूत बनाएगा। इससे सरकार को किफायती सब्सिडी नीति बनाने और गरीब वर्गों तक बेहतर वितरण सुनिश्चित करने में सहायता मिलेगी। हालांकि, योजना का यह संशोधन उन लोगों के लिए एक चुनौती भी हो सकता है जो पहले से ही सीमित सिलेंडरों का उपयोग कर रहे हैं।
सरकार ने इस बदलाव के संबंध में सभी हितधारकों को समय रहते अवगत कराने और शिकायत निवारण के लिए विशेष हेल्पलाइन और ऑनलाइन पोर्टल भी स्थापित किए हैं। उज्ज्वला योजना के तहत LPG सिलेंडरों की संख्या घटाने का यह निर्णय सरकारी संसाधनों के न्यायसंगत वितरण और सामाजिक समानता के प्रति समर्पण की भी झलक है।
आगामी दिनों में सरकार और पेट्रोलियम मंत्रालय योजना के क्रियान्वयन की समीक्षा करते रहेंगे और लाभार्थियों की फीडबैक के आधार पर आवश्यक परिवर्तनों पर विचार करेंगे। योजना का उद्देश्य है कि देश के अंतिम हिस्से तक स्वच्छ ईंधन पहुंचाना और स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र में भारत को एक मजबूत बदलाव की ओर ले जाना।






































































