Despite grave concerns raised in the white paper, Kerala budget silent on bringing down committed expenditure

तिरुवनंतपुरम, 2024: केरल सरकार द्वारा प्रस्तुत आगामी बजट में प्रतिबद्ध व्यय को कम करने के मामलों पर गंभीर चुप्पी देखी गई है, जबकि सरकारी व्हाइट पेपर में इस विषय पर स्पष्ट चिंता व्यक्त की गई थी। चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए प्रतिबद्ध व्यय लगभग ₹1.22 लाख करोड़ से अधिक रहने का अनुमान है, जो राज्य की कुल राजस्व का लगभग तीन-चौथाई हिस्सा वेतन, पेंशन और ब्याज भुगतानों पर खर्च करेगा।

प्रतिबद्ध व्यय की इस व्यापक मात्रा के कारण केरल सरकार की वित्तीय स्थिरता पर प्रश्न उठ रहे हैं। इस प्रकार के खर्चों को कम न करने से राज्य की विकास योजनाओं और अन्य सार्वजनिक सेवाओं के लिए पूंजी आवंटन सीमित होता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वेतन और पेंशन जैसे खर्चों को नियंत्रण में नहीं रखा गया, तो राज्य की राजकोषीय स्थिति और भी चुनौतीपूर्ण हो जाएगी।

व्हाइट पेपर में ये भी निष्कर्ष निकाला गया है कि ऐसे खर्चों की उच्चता सरकार को नई परियोजनाओं और सामाजिक कल्याण कार्यक्रमों के लिए पर्याप्त संसाधन आवंटित करने से रोकती है। इसके अलावा, लंबित ब्याज भुगतान ने भी राज्य का वित्तीय घाटा बढ़ाया है, जो निवेश और आर्थिक विकास की संभावनाओं को प्रभावित कर सकता है।

केरल की आर्थिक स्थिति को सुधारने के लिए विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि प्रतिबद्ध व्यय को कम करना अनिवार्य है, ताकि अधिक वित्तीय संसाधन शिक्षा, स्वास्थ्य, आधारभूत संरचना, और अन्य विकासात्मक क्षेत्रों में लगाया जा सके। इसके लिए किफायती प्रबंधन के साथ-साथ वेतन और पेंशन नीतियों में पुनर्विचार आवश्यक होगा।

सरकारी अधिकारी इस विषय पर फिलहाल चुप्पी क्यों साधे हुए हैं, इस पर राज्य की जनता और अर्थशास्त्री मिलकर चर्चा कर रहे हैं। बजट प्रस्तुति में प्रतिबद्ध व्यय पर ठोस रणनीति न होना तर्कसंगत चिंता का विषय है। राज्य सरकार को इस मुद्दे पर पारदर्शिता के साथ साथ त्वरित और प्रभावी कदम उठाने की आवश्यकता है, ताकि केरल की वित्तीय सेहत मजबूत बने और विकास का मार्ग सुचारू रहे।

Source

Please follow and like us:
X (Twitter)
Visit Us
Follow Me
Tags: