नई दिल्ली: घरेलू एलपीजी (लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस) सिलेंडर की कीमतों में फिर से बढ़ोतरी की गई है। हाल ही में सरकार ने 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत में ₹29 की वृद्धि की घोषणा की है। यह बढ़ोतरी मार्च की शुरुआत में हुई ₹60 प्रति सिलेंडर की बढ़ोतरी के बाद आई है।
मिली जानकारी के अनुसार, इस बढ़ोतरी का मुख्य कारण पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और अस्थिर स्थिति है, जिसने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को बाधित किया है। इससे अंतरराष्ट्रीय बाजारों में ईंधन की कीमतों में वृद्धि हुई है, जो अंततः घरेलू एलपीजी के दामों में वृद्धि के रूप में काम कर रही है।
एलपीजी कंज्यूमर फोरम और उद्योग विशेषज्ञों के अनुसार, जब से वैश्विक बाजार में तेल की कीमतें बढ़ी हैं, सरकार को घरेलू गैस सिलेंडरों की कीमतों में बढ़ोतरी करनी पड़ी है ताकि विपणन व आपूर्ति प्रणाली में संतुलन बना रहे।
इस बढ़ोतरी का प्रभाव आम उपभोक्ताओं पर सीधे पड़ेगा, विशेषकर उन परिवारों पर जो दैनिक उपयोग के लिए एलपीजी पर निर्भर हैं। पिछले कई महीनों में सिलेंडर की कीमतों में हुई लगातार बढ़ोतरी उपभोक्ताओं के बजट को प्रभावित कर रही है।
सरकार ने इस बीच यह भी स्पष्ट किया है कि एलपीजी सब्सिडी योजना के तहत योग्य परिवारों को सब्सिडी मिलती रहेगी, जिससे कम आय वाले परिवारों को राहत मिलेगी। हालांकि, सब्सिडी के बावजूद नकद भुगतान करने वालों के लिए सिलेंडर महंगा हो गया है।
वित्तीय विशेषज्ञ बताते हैं कि यह स्थिति आगामी महीनों में भी जारी रह सकती है, क्योंकि वैश्विक स्तर पर ऊर्जा संकट और राजनीतिक अस्थिरता अभी समाप्त नहीं हुई है। इसलिए, घरेलू ऊर्जा उपभोगकर्ताओं को अपने खर्चों में सावधानी बरतनी पड़ सकती है।
इस बढ़ोतरी को लेकर विभिन्न राजनीतिक दल और नागरिक संगठन भी अपनी प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। कुछ का कहना है कि सरकार को कीमतों को स्थिर रखने के लिए उपाय करने चाहिए, जबकि कुछ का मानना है कि वैश्विक बाजार की परिस्थितियों को देखते हुए यह निर्णय समझदारी पर आधारित है।
उल्लेखनीय है कि एलपीजी घरेलू उपयोग के लिए सबसे प्रचलित ईंधन है और इसकी कीमतों में बदलाव सीधे तौर पर देश के हर घर के बजट को प्रभावित करता है। इसलिए इस बढ़ोतरी को लेकर आम जनता में चिंता बढ़ी हुई है।
कुल मिलाकर, वैश्विक ऊर्जा संकट के चलते घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में वृद्धि अनिवार्य हो गई है, जिससे आम नागरिकों के लिए यह महंगा होता जा रहा है। उपभोक्ताओं को सलाह दी जाती है कि वे गैस की खपत को बेहतर तरीके से प्रबंधित करें और सरकारी किसी भी नई योजना या राहत उपायों की जानकारी लेते रहें।


































































