Panel grills Centre on OMCs’ failure to absorb oil shock

नई दिल्ली। वित्त समिति ने अमेरिकी-ईरान तनाव के कारण ईंधन मूल्य वृद्धि और बढ़ती महंगाई को लेकर चिंता जताई है। समिति ने केंद्र सरकार से विस्तृत प्रतिक्रिया मांगते हुए कहा कि इस संकट से निपटने में ऑइल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) की भूमिका संतोषजनक नहीं रही है।

समिति की बैठक में चर्चा की गई कि कैसे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में अनिश्चितता ने घरेलू ईंधन कीमतों पर नकारात्मक प्रभाव डाला है, जिससे आम जनता की जेब पर भारी भार पड़ा है। वित्त समिति ने सरकार को निर्देश दिया कि वह इस विषय पर एक स्पष्ट रणनीति बनाकर साझा करे, जिससे ईंधन मूल्य स्थिर रखे जा सकें और मुद्रास्फीति पर नियंत्रण पाया जा सके।

संसद के सदस्यों ने यह भी सवाल उठाया कि OMCs ने इस वैश्विक संकट के बीच मूल्य वृद्धि को बढ़ाने के लिए कोई प्रभावी उपाय क्यों नहीं किए। समिति ने केंद्र से यह अपेक्षा जताई कि वे इस मामले में पूरी पारदर्शिता के साथ काम करें और ईंधन की कीमतों को किफायती बनाए रखें।

वित्त मंत्री ने बैठक में कहा कि सरकार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव को लेकर सतर्क है और घरेलू संकट को कम करने के लिए कई कदम उठाए जा रहे हैं। लेकिन समिति ने जोर देकर कहा कि ओएमसीज़ को अपनी जिम्मेदारियों को गंभीरता से लेना होगा और उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए ठोस कदम उठाने होंगे।

वहीं, विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिकी-ईरान के बीच तनाव के बढ़ने से ऊर्जा बाजार में और अनिश्चितता बढ़ सकती है, जिससे घरेलू स्तर पर ईंधन की महंगाई और भी बढ़ेगी। ऐसे समय में, सरकार और OMCs के बीच बेहतर तालमेल और सक्रिय नीतियां आवश्यक हैं ताकि आम जनता को ज्यादा नुकसान न हो।

फ्यूल प्राइस का असर सीधे तौर पर महंगाई दर पर पड़ता है, जिससे न केवल ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट बढ़ता है बल्कि गैस, बिजली, खाद्य पदार्थों समेत अन्य आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में भी लगातार वृद्धि होती है। इसलिए यह आवश्यक है कि केंद्र सरकार समय रहते स्थिति का आकलन कर ऐसे उपाय करे जिससे अर्थव्यवस्था स्थिर बनी रहे।

इस बीच, वित्त समिति ने केंद्र से मांग की है कि वह ईंधन मूल्य पर सरकार की नीति, ओएमसी की भूमिका एवं महंगाई नियंत्रण के लिए अपनाए गए उपायों की विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करे। समिति की यह कार्रवाई दर्शाती है कि ईंधन संकट और महंगाई को लेकर संसद में गंभीरता से विचार किया जा रहा है।

सरकार की प्रतिक्रिया के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि संकट से निपटने के लिए मौजूदा नीतियों में कौन-कौन से बदलाव आवश्यक हैं और आम जनता को राहत देने के लिए अगला कदम क्या होगा। वित्त समिति की इस पहल से उम्मीद है कि सरकार और OMCs मिलकर ईंधन संकट एवं महंगाई की चुनौती का सामना प्रभावी ढंग से करेंगे।

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