Noida Airport names interim CEO after security clearance denied to Swiss chief

नोएडा: ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट के लिए बनाए गए सुरक्षा नियमों के अनुसार, एयरपोर्ट के सीईओ को सुरक्षा समन्वयक के रूप में कार्य करना अनिवार्य है और यह पद केवल भारतीय नागरिक के लिए आरक्षित है। इसी कारण से, जब स्विट्जरलैंड के प्रमुख को सुरक्षा मंजूरी नहीं मिली, तो नोएडा एयरपोर्ट प्रबंधन ने तत्काल प्रभाव से एक भारतीय नागरिक को अंतरिम सीईओ के रूप में नियुक्त किया है।

इस नए नियम का उद्देश्य देश की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देना और विमानन सुरक्षा मानकों को सख्ती से लागू करना है। एयरोपोर्ट अथॉरिटी के अधिकारीयों के अनुसार, सीईओ का पद केवल उन्हीं के लिए खुला है, जो भारतीय सुरक्षा एजेंसियों द्वारा पूरी तरह से सत्यापित और आश्वस्त किए गए हों।

स्विस सीईओ की सुरक्षा मंजूरी अस्वीकृत हो जाने के बाद, इस फैसले ने विमानन उद्योग में कांटेदार चर्चा को जन्म दिया है, जिसमें विदेशी विशेषज्ञों की भागीदारी और सुरक्षा प्रोटोकॉल के बीच संतुलन बनाने की चुनौती सामने आई है। इस बीच, नोएडा एयरपोर्ट के अधिकारियों ने बताया कि अंतरिम सीईओ के रूप में नियुक्त व्यक्ति के पास पर्याप्त अनुभव और विशेषज्ञता है जो अंतरराष्ट्रीय स्तर के मानकों के अनुरूप एयरपोर्ट को संचालित करने में सक्षम है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम न केवल सुरक्षा दृष्टिकोण से आवश्यक है, बल्कि यह देश में विमानन सुरक्षा को मजबूत करने के लिए भी महत्वपूर्ण है। एयरपोर्ट सुरक्षा समन्वयक के रूप में सीईओ की भूमिका में खामियां सुरक्षा जोखिम बढ़ा सकती हैं, जिसकी अनुमति नियम नहीं देते।

विमानन विशेषज्ञों ने सुझाव दिया कि विदेशी विशेषज्ञों को शामिल करना आवश्यक है लेकिन उन्हें ऐसे पदों पर नियुक्ति के लिए सुरक्षा मंजूरी प्रक्रिया से गुजरना होगा, ताकि राष्ट्रीय सुरक्षा प्रभावित न हो। यह नीति भविष्य में एयरपोर्ट प्रबंधन में पारदर्शिता और सुरक्षा सुनिश्चित करने में मददगार सिद्ध होगी।

नोएडा एयरपोर्ट के इस फैसले से यह स्पष्ट होता है कि भारत अपनी विमानन सुरक्षा मानकों को मजबूत करने और ऐतिहासिक रूप से संवेदनशील बिंदुओं पर नियंत्रण बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है। यह कदम देश की सुरक्षा व्यवस्था में नए मापदंड स्थापित करेगा, जिससे ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट जैसे महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर की विश्वसनीयता बढ़ेगी।

अंततः, एयरपोर्ट विनियमन प्राधिकरण और कैबिनेट ने भी इस दिशा में पूरी सहमति जताई है, जो भारतीय विमानन क्षेत्र को सुरक्षित, भरोसेमंद और आधुनिक बनाने के लिए आवश्यक है। नोएडा एयरपोर्ट का यह उदाहरण अन्य नए हवाईअड्डों के लिए मार्गदर्शक भी साबित होगा।

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