Herbal cigarettes no safer than tobacco, finds IITGN-Illinois study

नई दिल्ली। विश्व नो टोबैको डे के अवसर पर प्रकाशित एक हालिया अध्ययन में यह खुलासा हुआ है कि हर्बल सिगरेट, जो अक्सर तंबाकू से स्वस्थ विकल्प के रूप में प्रचारित किए जाते हैं, असल में तंबाकू उत्पादों जितनी ही खतरनाक या उससे भी अधिक हानिकारक हो सकते हैं। IIT गांधीनगर और इलिनोइस विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं द्वारा किए गए इस अध्ययन के नतीजों ने हर्बल सिगरेट के स्वास्थ्य और पर्यावरणीय प्रभावों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

अध्ययन के मुताबिक, हर्बल सिगरेट से निकलने वाले धुएं में हानिकारक तत्व और प्रदूषक की मात्रा पारंपरिक तंबाकू सिगरेट के बराबर या उससे अधिक होती है। यह तथ्य उन दावों को चुनौती देता है जिनमें कहा जाता है कि हर्बल सिगरेट सेहत के लिए बेहतर विकल्प हैं। शोध में यह भी बताया गया है कि हर्बल सिगरेट के उत्सर्जन से होने वाले प्रदूषण के प्रबंधन एवं नियंत्रण में नियामकीय खामियां हैं, जो उपभोक्ताओं के लिए जोखिम बढ़ाती हैं।

विश्व भर में हर्बल सिगरेट का इस्तेमाल खासतौर पर उन लोगों द्वारा बढ़ा है जो तंबाकू छोड़ने का प्रयास कर रहे हैं या जिन्हें इसके वैकल्पिक विकल्प की तलाश है। लेकिन यह नया शोध दिखाता है कि यह विकल्प सुरक्षित नहीं है और इसके सेवन से भी स्वास्थ्य पर गंभीर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकते हैं।

शोध की प्रमुख निष्कर्षों में यह शामिल है कि हर्बल सिगरेट से निकलने वाले हानिकारक कीटाणु, कण और रसायन श्वसन तंत्र में गहरा नुकसान पहुंचा सकते हैं तथा पर्यावरण प्रदूषण में इजाफा कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त, अध्ययन में सुझाव दिया गया है कि हर्बल सिगरेट के उत्पादन और प्रचार पर कठोर नियम और कड़ी निगरानी की आवश्यकता है ताकि उपभोक्ताओं को भ्रमित करने वाले गलत दावों को रोका जा सके।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि तंबाकू आधारित उत्पादों के मुकाबले हर्बल सिगरेट को एक सुरक्षित विकल्प के रूप में प्रस्तुत करना न केवल वैज्ञानिक दृष्टि से गलत है, बल्कि यह सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए भी खतरा बन सकता है। स्वास्थ्य संगठनों और नीति निर्माताओं को इस मुद्दे पर गंभीरता से सोचते हुए उचित नीति बनानी चाहिए जिससे उपभोक्ताओं की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।

यह अध्ययन विश्व नो टोबैको डे से पहले जारी किया गया है, जो लोगों को तंबाकू और उससे जुड़े उत्पादों के खतरों से अवगत कराने के उद्देश्य से मनाया जाता है। इस अवसर पर शोधकर्ताओं और स्वास्थ्य अधिकारियों ने जनता से अपील की है कि वे हर्बल सिगरेट को भी तंबाकू की तरह ही जोखिम भरा उत्पाद समझें और इसका सेवन न करें।

अंततः, यह निष्कर्ष स्पष्ट करता है कि हर्बल सिगरेट को एक स्वस्थ विकल्प के रूप में देखने की धारणा न केवल मिथक है, बल्कि इससे जुड़े खतरों को समझना और जागरूकता फैलाना अत्यंत आवश्यक है। उपभोक्ताओं को चाहिए कि वे अपने स्वास्थ्य के प्रति सजग रहें और बिना वैज्ञानिक प्रमाण के दावों पर विश्वास न करें।

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