Seizures could be early indicator of brain tumour, caution doctors

नई दिल्ली: भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) के राष्ट्रीय कैंसर रजिस्ट्री कार्यक्रम के आंकड़ों के अनुसार, मस्तिष्क के ट्यूमर केंद्रीय तंत्रिका तंत्र के कैंसर में सबसे अधिक पाए जाने वाले प्रकार हैं। देश भर के विभिन्न क्षेत्रीय रजिस्ट्री से एकत्रित आंकड़ों के माध्यम से यह स्पष्ट हुआ है कि मस्तिष्क के ट्यूमर ने कैंसर के मामलों में एक प्रमुख स्थान हासिल किया है।

इससे पहले भी विशेषज्ञों ने यह संकेत दिया था कि मस्तिष्क के रोगों में बढ़ोतरी हो रही है, लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर मिली यह जानकारी चिंता बढ़ाती है। विशेषज्ञों का कहना है कि मस्तिष्क के ट्यूमर के कारण होने वाले लक्षणों को समय पर पहचानना और उसका उपचार जरूरी है ताकि मरीजों को बेहतर जीवन मिल सके।

डॉक्टरों ने बताया कि मस्तिष्क के ट्यूमर की शुरुआत में मिरगी या दौरे पड़ना एक प्रमुख संकेत हो सकता है। इस कारण से मिरगी को हल्के में नहीं लेना चाहिए, बल्कि इसके पीछे गंभीर कारण हो सकते हैं। समय पर जांच और निदान से ट्यूमर के बढ़ने को रोका जा सकता है और इलाज के बेहतर विकल्प अपनाए जा सकते हैं।

राष्ट्रीय कैंसर रजिस्ट्री कार्यक्रम के अनुसार, मस्तिष्क के ट्यूमर की घटनाओं में बढ़ोतरी के पीछे कारणों पर शोध कर रही संस्थाएं यह जानने का प्रयास कर रही हैं कि किन कारणों से इन मामलों में इजाफा हुआ है। पर्यावरणीय, जीवनशैली एवं आनुवांशिक पहलुओं का विश्लेषण किया जा रहा है।

विशेषज्ञों ने जनता से अपील की है कि वे किसी भी अनियमित मस्तिष्क संबंधी लक्षण जैसे बार-बार मिर्गी का दौरा, अचानक सिरदर्द, नजर का बिगड़ना या मानसिक संतुलन में खराबी आने पर तुरंत चिकित्सक से सलाह लें। समय पर जांच कराकर उचित उपचार से जानलेवा बीमारी से निपटा जा सकता है।

भारत में कैंसर के बढ़ते मामलों के मद्देनजर स्वास्थ्य मंत्रालय ने भी जागरूकता अभियान तेज कर दिए हैं ताकि लोगों को इस बीमारी के बारे में सही जानकारी मिल सके और प्रारंभिक चरण में ही इसका पता लगाया जा सके। विशेषज्ञों का मानना है कि देश में भविष्य में कैंसर नियंत्रण के लिए मजबूत स्वास्थ्य रणनीतियां अपनाना अत्यंत आवश्यक है।

इस रिपोर्ट से स्पष्ट है कि मस्तिष्क के ट्यूमर अब केवल कुछ दुर्लभ मामलों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती बनता जा रहा है। इसलिए, उचित रोकथाम, समय पर निदान और बेहतर उपचार पद्धतियों को प्राथमिकता देकर इस समस्या से निपटा जाना होगा।

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