Carrot extract can make fake ghee dodge quality test: study

वाराणसी। एक नई शोध रिपोर्ट में दावा किया गया है कि गाजर के अर्क का उपयोग करके नकली घी को असली गाय के घी की तरह दिखाकर गुणवत्ता परीक्षण में धोखा दिया जा सकता है। बीएचयू (बारहमासी हिन्दू विश्वविद्यालय) के आईआईटी के शोधकर्ताओं ने यह खुलासा किया है कि गाजर के रंजक (पिगमेंट) से猪 वसा या पाम ऑयल को इस तरह तैयार किया जा सकता है, जिससे उसका रमन स्पेक्ट्रम असली गाय के घी जैसा दिखता है।

शोधकर्ताओं का कहना है कि यह खोज खाद्य सुरक्षा के क्षेत्र में एक बड़ी चेतावनी है, क्योंकि पाम ऑयल या猪 वसा के साथ गाजर के रंग का उपयोग कर नकली घी बनाकर बाजार में बेचा जा सकता है। इससे उपभोक्ताओं को नुकसान हो सकता है और गुणवत्ता मानकों पर भी सवाल खड़े हो सकते हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, रमन स्पेक्ट्रोस्कोपी तकनीक का इस्तेमाल आमतौर पर खाद्य पदार्थों की प्रामाणिकता और गुणवत्ता जांच के लिए किया जाता है। गाय के घी की पहचान के लिए रमन स्पेक्ट्रम में विशेष चरित्र होते हैं, जिन्हें शोधकर्ताओं ने अध्ययन किया। लेकिन गाजर के अर्क के आंकड़ों से मिक्सचर बनाकर वह स्पेक्ट्रम नकली समाग्री में भी उत्पन्न किया जा सकता है, जिससे जांच में धोखा पाया गया।

आईआईटी बीएचयू के वैज्ञानिकों ने कहा कि यह खोज खाद्य उद्योग के लिए एक चुनौती है, और गुणवत्ता जांच के और सघन तरीके विकसित करने की आवश्यकता है। वे यह भी सुझाव देते हैं कि बाजार में बिकने वाले घी की नियमित जांच के लिए अधिक उन्नत तकनीकों का इस्तेमाल किया जाना चाहिए, ताकि उपभोक्ता धोखाधड़ी से बच सकें।

खाद्य सुरक्षा विशेषज्ञों ने इस शोध को सराहा है और कहा कि इस तरह की तकनीकी जानकारी उपभोक्ताओं की सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी है। इस अध्ययन ने नकली घी की पहचान के लिए नई दिशाएं खोली हैं, जो भारतीय बाजार में गुणवत्ता बनाए रखने में मददगार साबित हो सकती हैं।

वहीं, उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय ने भी कहा है कि वे इस मुद्दे पर सतर्क हैं और आवश्यक कार्रवाई करेंगे ताकि नकली खाद्य पदार्थों के बाजार में प्रवेश पर रोक लगाई जा सके। उन्होंने उपभोक्ताओं से अपील की है कि वे हमेशा विश्वसनीय स्रोतों से ही घी खरीदें और संदिग्ध वस्तुओं के प्रति सतर्क रहें।

इस खोज से यह स्पष्ट हो गया है कि नकलीखाद्य पदार्थों की पहचान और परीक्षण के तरीकों में निरंतर सुधार आवश्यक है, जिससे भारतीय बाजार में खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। इस दिशा में आईआईटी बीएचयू के शोध शोध के परिणाम खाद्य उद्योग और नीति निर्धारकों दोनों के लिए महत्वपूर्ण साबित होंगे।

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