नई दिल्ली। त्वचा विशेषज्ञों के अनुसार, नाखूनों पर लंबे समय तक बने सफेद धारियाँ, पट्टियाँ या रंग में बदलाव कभी-कभी पोषण की कमी, चयापचय विकारों और दीर्घकालिक प्रणालीगत बीमारियों के शुरुआती संकेत प्रदान कर सकते हैं। यह जानकारी उन लोगों के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है जो नाखूनों में बदलाव को सामान्य नजरअंदाज कर देते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि नाखून शरीर की संपूर्ण सेहत का आईना होते हैं। अगर नाखूनों में लगातार सफेद रंग की रेखाएं या धब्बे दिखाई देने लगें, तो यह कैल्शियम, जिंक या प्रोटीन जैसे पोषक तत्वों की कमी को दर्शा सकता है। इसके अलावा, श्वेत पट्टियाँ कुछ मेटाबोलिक विकारों या गुर्दे और लीवर से जुड़ी बीमारियों का संकेत भी हो सकती हैं।
डर्मेटोलॉजिस्ट डॉ. अंजलि शर्मा बताती हैं, “नाखूनों में बार-बार सफेद धब्बे या धारियां आना न केवल पोषण की कमी बल्कि अपच, मधुमेह या थायरॉयड जैसी बीमारियों की ओर भी इशारा कर सकता है। इसलिए इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।”
एक ताजा अध्ययन में यह भी पाया गया है कि नाखूनों के रंग और बनावट में बदलाव का संबंध हृदय रोगों और सूजन से भी हो सकता है। उदाहरण के लिए, यदि नाखून पीले रंग के हो जाते हैं या उनकी सतह मोटी हो जाती है, तो यह फेफड़ों या दिल की बीमारी के लक्षण भी हो सकते हैं।
डर्मेटोलॉजिस्ट सलाह देते हैं कि यदि नाखूनों में रंग, बनावट या आकृति में असामान्य बदलाव महसूस हो तो जल्द से जल्द विशेषज्ञ से परामर्श लेना जरूरी है। उचित जांच और निदान के बाद ही समस्याओं का समाधान संभव होता है। नियमित पोषणयुक्त आहार और समय पर स्वास्थ्य जांच करवाते रहने से नाखूनों के माध्यम से कई बीमारियों की समय पर पहचान हो सकती है।
अंत में, नाखूनों में बदलाव को सामान्य सौंदर्य की समस्या के बजाय स्वास्थ्य संकेत के रूप में देखना चाहिए। यह हमारी सेहत का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हो सकते हैं, जो प्रारंभिक चेतावनी के रूप में काम करते हैं। इसलिए, स्वस्थ नाखूनों के लिए संतुलित आहार, पर्याप्त जल सेवन और नियमित व्यायाम आवश्यक है।



























