Indian children among most exposed to extreme heat, drought, and multiple climate hazards: UNICEF Report

नई दिल्ली। यूनिसेफ की ताजा रिपोर्ट ‘चिल्ड्रन्स क्लाइमेट रिस्क रिपोर्ट 2026’ के अनुसार, भारत में बच्चों की जलवायु संकटों के प्रति संवेदनशीलता अत्यधिक बढ़ गई है। खासकर अत्यधिक गर्मी और सूखे जैसी घटनाओं से बच्चों पर गहरा प्रभाव पड़ रहा है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि भारत के कई हिस्सों में बच्चे कई तरह की जलवायु जोखिमों के संपर्क में हैं, जिससे उनकी स्वास्थ्य और जीवन स्तर पर गंभीर खतरे मंडरा रहे हैं।

यूनिसेफ की रिपोर्ट के अनुसार, जलवायु परिवर्तन के कारण बढ़ते तापमान और सूखे की आवृत्ति में वृद्धि, भारतीय बच्चों के लिए एक बड़ा खतरा बन गई है। अत्यधिक गर्मी से तापीय तनाव, स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं और पूरी दिनचर्या प्रभावित हो रही है। सूखे के कारण खाद्य सुरक्षा संकट और पानी की कमी जैसी समस्याएं बच्चों के जीवन को सीधे प्रभावित कर रही हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों की जलवायु संवेदनशीलता केवल स्वास्थ्य तक सीमित नहीं है, बल्कि ये शिक्षा, मानसिक स्वास्थ्य और सामाजिक जीवन को भी प्रभावित करती है। बढ़ती गर्मी के कारण स्कूलों में उपस्थिति घटती है, क्योंकि बच्चे घरों में या शारीरिक रूप से कमजोर होने के कारण बाहर नहीं जा पाते। साथ ही, सूखा और गर्म मौसम के कारण गरीब परिवारों की आर्थिक स्थिति और भी कमजोर हो रही है, जिससे बच्चों को आवश्यक पोषण और स्वास्थ्य सेवाएं मिलना मुश्किल हो रहा है।

भारत सरकार और विभिन्न गैर-सरकारी संगठन इस खतरे को कम करने के लिए कई कदम उठा रहे हैं, जैसे कि आपातकालीन राहत कार्य, स्वास्थ्य अभियान और जल संरक्षण परियोजनाएं। लेकिन, विशेषज्ञों का मानना है कि इसके लिए व्यापक और दीर्घकालिक रणनीतियों का निर्माण जरूरी है, जिसमें बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाए।

यूनिसेफ की रिपोर्ट स्पष्ट करती है कि जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए वैश्विक स्तर पर सहयोग बढ़ाने की आवश्यकता है ताकि बच्चों के भविष्य को सुरक्षित रखा जा सके। इस संदर्भ में भारत जैसे विकासशील देश में विशेष ध्यान देने की जरूरत है, जहां जलवायु जोखिम अधिक हैं और प्रभाव गहरे हैं।

आज की दुनिया में बच्चों का स्वस्थ और सुरक्षित विकास सुनिश्चित करना हम सभी की जिम्मेदारी है। यह रिपोर्ट एक सतर्कता और प्रेरणा का स्रोत है कि हम जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से बच्चों को बचाने के लिए जल्द से जल्द ठोस कदम उठाएं।

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