As India rapidly ages, more people require medical care at home. What’s missing? Insurance

देश में बुजुर्गों की संख्या में हो रही तेज़ वृद्धि के साथ ही घर पर चिकित्सा देखभाल (होम केयर) की मांग भी तेजी से बढ़ रही है। डॉक्टर, वृद्ध देखभाल विशेषज्ञ और रोगी प्रतिनिधि इस बात पर जोर दे रहे हैं कि स्वास्थ्य बीमा नीतियों में अस्पताल में भर्ती होने से बाहर भी कवर करने की व्यवस्था होनी चाहिए, खासकर घर पर दी जाने वाली देखभाल के लिए।

गृह आधारित चिकित्सा देखभाल अब आधुनिक उपचार और रिहैबिलिटेशन की एक अहम कड़ी बन चुकी है। कई ऐसे मरीज होते हैं, जिन्हें लंबे समय तक अस्पताल में रहना मुश्किल या अनावश्यक होता है, और उन्हें घर पर इलाज और देखभाल की जरूरत होती है। लेकिन मौजूदा स्वास्थ्य बीमा योजनाएं सामान्यत: केवल अस्पताल में भर्ती होने वाली चिकित्सा सेवाओं तक सीमित हैं, जिसके कारण यह महत्वपूर्ण सेवा बाहरी हैल्थकेयर विकल्प बीमा कवरेज से बाहर रह जाती है।

विशेषज्ञों की राय

गैराट्रिक केयर (वृद्ध देखभाल) विशेषज्ञों का कहना है कि बुजुर्ग मरीजों को अक्सर फ्लेक्सिबल और किफायती देखभाल की आवश्यकता होती है, जो अस्पताल में भर्ती होकर पूरी नहीं की जा सकती। घर पर दी जाने वाली देखभाल न केवल मरीज के आराम और मानसिक स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है, बल्कि इससे अस्पतालों पर भी बोझ कम होता है।

डॉक्टर और रोगी प्रतिनिधि लगातार नीति निर्माताओं और बीमा कंपनियों से इस कमी को दूर करने और स्वास्थ्य बीमा को व्यापक बनाने की मांग कर रहे हैं, ताकि अधिक से अधिक लोग होम केयर जैसी सेवाओं का लाभ उठा सकें। वर्तमान में, बीमा योजनाओं में होम केयर सेवाओं को शामिल न किए जाने से चिकित्सा खर्च बहुत ज्यादा हो जाता है, जो कई परिवारों के लिए आर्थिक बोझ बन जाता है।

आगे की चुनौतियां और समाधान

  • स्वास्थ्य बीमा कंपनियों को आवश्यक है कि वे होम केयर कवर को अपनी पालिसी में शामिल करें।
  • सरकारी नीतियों में भी इस क्षेत्र को प्रोत्साहन देना चाहिए ताकि हेल्थकेयर सेक्टर में नवाचार और निवेश बढ़े।
  • जनता को जागरूक किया जाना चाहिए कि वे होम केयर विकल्पों को अपनाएं और इनके लिए वित्तीय सुरक्षा सुनिश्चित करें।

अंततः, भारत में तेजी से बढ़ती आबादी के वृद्ध होने के साथ स्वास्थ्य सेवाओं का स्वरूप भी बदल रहा है। होम केयर को स्वास्थ्य बीमा में शामिल करना आज की जरूरत बन चुका है ताकि बुजुर्गों को बेहतर और समुचित चिकित्सा सुविधा मिल सके। इस दिशा में कदम उठाने से न केवल मरीजों का जीवन सरल होगा बल्कि स्वास्थ्य प्रणाली भी अधिक टिकाऊ और प्रभावी बनेगी।

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