If telemedicine’s gains are to be truly equitable, the focus needs to be on rural women

टेलीमेडिसिन ने स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में क्रांति ला दी है, खासकर उन इलाकों में जहां अस्पताल या डॉक्टर तक पहुंच सीमित है। हालांकि, डिजिटल स्वास्थ्य सेवा का लाभ ग्रामीण महिलाओं तक पर्याप्त रूप से नहीं पहुंच पा रहा है। यह समस्या केवल तकनीकी या अवसंरचना की कमी के कारण नहीं है, बल्कि घरों में गहरे पैठे असमानताओं के कारण भी है।

ग्रामीण महिलाओं के लिए टेलीमेडिसिन का लाभ उठाना चुनौतीपूर्ण इसलिए बन जाता है क्योंकि उनके पास व्यक्तिगत उपकरण जैसे स्मार्टफोन या टैबलेट का अभाव होता है। अक्सर परिवार में एक ही डिवाइस साझा किया जाता है, जिससे महिलाओं को समय और सुविधा की असुविधा होती है। इसके अलावा, डिजिटल साक्षरता की कमी भी एक महत्वपूर्ण बाधा है। कई महिलाएं स्मार्टफोन या इंटरनेट का उपयोग करना ठीक से नहीं जानतीं, जिससे वे ऑनलाइन स्वास्थ्य सेवा से जुड़ने में असमर्थ रहती हैं।

एक अन्य गंभीर समस्या यह है कि ग्रामीण घरों में महिलाओं के पास निजी जगह का अभाव रहता है जहाँ वे बिना किसी व्यवधान के डॉक्टर से गोपनीयता के साथ परामर्श कर सकें। घरेलू माहौल में अक्सर दूसरे सदस्य मौजूद रहते हैं, जिससे स्वास्थ्य से जुड़ी संवेदनशील चर्चा करना कठिन हो जाता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि टेलीमेडिसिन को सफल और समान रूप से पहुंचाने के लिए तकनीक पर ध्यान देने के साथ-साथ सामाजिक और सांस्कृतिक बाधाओं को भी दूर करना होगा। महिलाओं को डिजिटल उपकरण और इंटरनेट की पहुंच देना आवश्यक है, साथ ही डिजिटल साक्षरता को बढ़ावा देना भी जरूरी है। इसके साथ ही, घरेलू माहौल में महिलाओं के लिए सुरक्षित और निजी स्थान उपलब्ध कराना भी आवश्यक होगा ताकि वे चिकित्सा सेवा का लाभ उठा सकें।

सरकार और स्वास्थ्य संस्थानों को मिलकर ग्रामीण स्तर पर जागरूकता अभियान चलाने चाहिए, जिससे टेलीमेडिसिन की पहुंच बढ़ाई जा सके। स्थानीय समुदायों की भागीदारी सुनिश्चित कर के घरेलू असमानताओं और लैंगिक बाधाओं को समाप्त करना भी एक बड़ा कदम होगा। इस दिशा में ठोस प्रयास किए जाने पर ही टेलीमेडिसिन की सम्भावनाएं ग्रामीण महिलाओं तक प्रभावी रूप से पहुंच पाएंगी और स्वास्थ्य सेवा का वास्तविक सौभाग्य सबको मिल सकेगा।

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