नई दिल्ली। विश्व रक्त कैंसर दिवस के अवसर पर विशेषज्ञों ने भारत में स्टेम सेल डोनर रजिस्ट्री के महत्व पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि मेलोडिस्प्लास्टिक सिंड्रोम, ल्यूकेमिया तथा अन्य रक्त कैंसर से पीड़ित मरीजों के लिए रक्त स्टेम सेल दान एक जीवन रक्षक उपचार हो सकता है। मगर देश के टियर-2 और टियर-3 शहरों के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों से दाता पंजीकरण की संख्या अपेक्षाकृत कम है, जो गंभीर चिंता का विषय है।
विशेषज्ञों का कहना है कि मेट्रो शहरों में रक्त स्टेम सेल दान के प्रति जागरूकता में काफी सुधार हुआ है। यहां के लोगों ने इस विषय पर अपने संदेह और भ्रांतियों को दूर किया है, जिससे रजिस्ट्री में वृद्धि हुई है। इसके विपरीत, छोटे शहरों और गांवों में अभी भी जागरूकता की कमी और सामाजिक, सांस्कृतिक बाधाएं प्रमुख हैं, जो दान प्रक्रिया को लेकर अवरोध उत्पन्न करती हैं।
दाताओं की कमी का तथ्य और समाधान
देश भर में क़रीब 70% से अधिक ब्लड काउंसिल और स्टेम सेल बेस्ड अस्पताल बड़े शहरों में केंद्रित हैं। यही कारण है कि इन क्षेत्रों में दाता रजिस्ट्रेशन ज्यादा देखने को मिले हैं। वहीं, ग्रामीण इलाकों के लोगों को आमतौर पर दान की प्रक्रिया और इसकी आवश्यकता के बारे में विस्तृत जानकारी नहीं मिल पाती।
एक वरिष्ठ हेमेटोलॉजिस्ट ने बताया, “स्टेम सेल डोनेटर्स की संख्या में संतुलन लाने के लिए विशेष रूप से ग्रामीण भागों और छोटे शहरों में अभियान चलाना जरूरी है ताकि अधिक विविधता के साथ दाता रिकॉर्ड किया जा सके।”
सरकारी और गैर-सरकारी पहलें
सरकार और कई गैर-सरकारी संगठन रक्त कैंसर के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए समय-समय पर विभिन्न कार्यक्रम आयोजित करते हैं। फ्लैश मॉब, सेमिनार, स्वास्थ्य शिविर आदि के माध्यम से लोगों को रक्त स्टेम सेल दान की आवश्यकता और प्रक्रिया समझाई जा रही है।
इसके अलावा मोबाइल ऐप्स और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए दाता पंजीकरण को सरल और सुगम बनाने का प्रयास किया जा रहा है, जिससे ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों के लोग भी आसानी से इस सेवा से जुड़ सकें।
निष्कर्ष
रक्त कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे मरीजों के जीवनदान के लिए रक्त स्टेम सेल दान एक प्रभावी साधन है। लेकिन इसके लिए देश के सभी हिस्सों से दाताओं की समावेशी भागीदारी आवश्यक है। सहायक और जागरूक समुदाय बनाने के लिए सामाजिक और आर्थिक बाधाओं को दूर करना होगा, जिससे यह मिशन सफल हो सके। विशेषज्ञ, सरकार और समाज की संयुक्त कोशिशें ही इस दिशा में बदलाव ला सकती हैं।


































