नई दिल्ली। भारत के राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने सोमवार को देशभर के राज्यों को सिकिल सेल एनीमिया जैसी गंभीर बीमारी को हल्के में नहीं लेने की बात कही। उन्होंने खासतौर पर देश की आदिवासी समुदायों के बीच इस बीमारी के प्रति जागरूकता बढ़ाने का आह्वान किया। राष्ट्रपति ने कहा कि 2047 तक इस बीमारी को भारत से समाप्त करना राष्ट्र की प्राथमिकता होनी चाहिए।
राष्ट्रपति मुर्मु ने एक आधिकारिक कार्यक्रम में कहा, “सिकिल सेल एनीमिया एक ऐसी बीमारी है जो विशेष रूप से हमारे आदिवासी क्षेत्रों में व्यापक रूप से फैली हुई है। इसे नजरअंदाज करना कहीं भी देश के लिए सुरक्षित नहीं होगा। हमें इसके खिलाफ सामूहिक प्रयास करना होगा।”
सिकिल सेल एनीमिया एक आनुवंशिक रक्त रोग है जिसमें लाल रक्त कोशिकाएं असामान्य हो जाती हैं और वे शरीर के विभिन्न हिस्सों को पर्याप्त ऑक्सीजन पहुंचाने में असमर्थ हो जाती हैं। इसके कारण रोगी को बार-बार दर्द, थकान और अन्य गंभीर जटिलताओं का सामना करना पड़ता है। भारत में लगभग 1.4 से 1.5 करोड़ लोग इस बीमारी से प्रभावित हैं, जिनमें से अधिकतर आदिवासी तथा पिछड़े समुदायों से संबंधित हैं।
राष्ट्रपति मुर्मु ने राज्यों को निर्देश दिए कि वे इस बीमारी के प्रबंधन और रोकथाम के लिए जन-जातीय क्षेत्रों में विशेष स्वास्थ्य शिविर और जागरूकता अभियान चलाएं। उन्होंने कहा कि शिक्षा, समय पर निदान और उचित चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना इस लड़ाई की रणनीति के महत्वपूर्ण अंग होंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार की सक्रिय भागीदारी और समन्वित सामाजिक प्रयासों से 2047 तक सिकिल सेल एनीमिया को लगभग समाप्त किया जा सकता है। इसके लिए पूरा देश मिलकर काम करे तो ही यह मिशन सफल होगा।
इस अवसर पर स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारियों ने भी इस बीमारी के खिलाफ कई नई पहल का परिचय दिया, जिसमें नवजातों के स्क्रीनिंग प्रोग्राम, जनजातीय क्षेत्रों के लिए मोबाइल हेल्थ क्लिनिक और व्यापक जागरूकता अभियान शामिल हैं।
भारत की सरकार ने पहले भी कई बार एड्स, टीबी, मलेरिया जैसी बीमारियों के खिलाफ काम किया है और सिकिल सेल एनीमिया को भी उतनी ही प्राथमिकता देने की आवश्यकता है। इस स्वास्थ्य चुनौती से निपटना न केवल जनमानस की भलाई के लिए आवश्यक है, बल्कि यह सामाजिक स्थिरता और समावेशन के लिए भी अहम होगा।
अंत में राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा, “यह हमारा कर्तव्य है कि हम हर नागरिक को स्वस्थ जीवन का अवसर दें। सिकिल सेल एनीमिया जैसी बीमारियों से लड़ने में हम सबका योगदान महत्वपूर्ण होगा, यही भारत को सशक्त और स्वस्थ राष्ट्र बनाएगा।”














































































