तिरुवनंतपुरम, 26 अप्रैल: मलेरिया परजीवी के ड्रग प्रतिरोध से जुड़ी नई खोज ने चिकित्सा जगत में उम्मीद की किरण जगाई है। आरजीसीबी (रजिस्ट्री ऑफ जीनोमिक और सेलुलर बायोलॉजी) के वैज्ञानिकों ने एक नए मेकैनिज्म का पता लगाया है, जिसके कारण मलेरिया परजीवी आर्टेमिसिनिन सहित दवाइयों के प्रभाव को सहन करने में सक्षम हो पाते हैं। इस खोज से मलेरिया के उपचार में नई रणनीतियां विकसित करने में मदद मिलने की संभावना है।
अध्ययन के अनुसार, जब मलेरिया परजीवी रेटिकुलोसाइट्स (शरीर में पाए जाने वाले विशेष प्रकार के युवा लाल रक्त कण) को संक्रमित करता है, तो वह इस सुरक्षात्मक परिवेश का लाभ उठाता है। इस सुरक्षित वातावरण में परजीवी तेजी से विकास करता है और आर्टेमिसिनिन उपचार से उत्पन्न ऑक्सीडेटिव क्षति को बेहतर ढंग से सहन कर पाता है। इससे परजीवी दवा के खिलाफ प्रतिरोध विकसित करता है, जिससे उपचार प्रक्रिया जटिल हो जाती है।
आरजीसीबी के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. अजय वर्मा ने बताया, “हमारे परिणाम दिखाते हैं कि परजीवी का यह विशेष व्यवहार ही दवा प्रतिरोध के पीछे का मुख्य कारण है। इससे रक्त में परजीवी का प्रजनन तेजी से होता है और दवाओं का असर कम हो जाता है।”
आर्टेमिसिनिन आधारित थेरेपी वर्तमान में मलेरिया के उपचार का प्रमुख आधार है। लेकिन प्रतिरोध के बढ़ने से यह चुनौतीपूर्ण हो गया है। इस अध्ययन से मिलने वाली जानकारी से नई दवाओं के विकास और उपचार प्रोटोकॉल में सुधार किया जा सकेगा।
मलेरिया से प्रभावित देशों के लिए यह संकेत है कि परजीवी के धीरे-धीरे विकसित हो रहे प्रतिरोध से निपटने के लिए नवीनतम शोधों का सहारा लेना आवश्यक होगा। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि आरजीसीबी की यह खोज वैश्विक स्तर पर मलेरिया नियंत्रण में सहायक सिद्ध होगी।
आरजीसीबी के इस अध्ययन को प्रमुख वैज्ञानिक जर्नल में प्रकाशित किया गया है, जहां इसे व्यापक शोध समुदाय द्वारा सराहा गया है। आगे की जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जाएगी कि इस मेकैनिज्म को किस तरह से रोककर दवा की क्षमता को पुनः प्रभावी बनाया जा सके।
इस खोज के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि मलेरिया परजीवी के खिलाफ नई रणनीतियों को अपनाकर विश्व से मलेरिया का अंत किया जा सकेगा और लाखों लोगों की जान बचाई जा सकेगी।














































































