CCMB scientists identify rare gene behind Indian girl’s red hair

नई दिल्ली। भारतीय वैज्ञानिकों ने लाल बालों की दुर्लभता के पीछे एक महत्त्वपूर्ण जीन की खोज की है, जिससे देश के जटिल आनुवंशिक परिदृश्य को समझने में नई जानकारी मिली है। पुणे स्थित सेंटर फॉर सेलुलर एंड मॉलिक्यूलर बायोलॉजी (CCMB) के शोधकर्ताओं ने MC1R जीन (मेलानोकोर्टिन 1 रिसेप्टर) की भूमिका का पता लगाया है, जो त्वचा और बालों की रंगाई की प्रक्रिया का मुख्य नियामक है। यह खोज भारतीय उपमहाद्वीप में आनुवंशिकी के क्षेत्र में नए अध्याय की शुरुआत समझी जा रही है।

MC1R जीन का अध्ययन सरकार और वृहद वैज्ञानिक समुदाय द्वारा दीर्घकालीन प्रयासों का परिणाम है। शोधकर्ताओं ने बताया कि इस जीन के विभिन्न स्वरूपों में बदलाव बालों के रंग को प्रभावित करते हैं और सीसीएमबी की टीम ने पहली बार यह साबित किया है कि भारतीय संदर्भ में भी MC1R जीन लाल बालों के लिए जिम्मेदार है। भारत जैसे विविधताओं से भरे देश में इस तरह की खोज आनुवंशिक विवेचना को और भी विस्तार देती है।

विशेषज्ञों का कहना है कि MC1R जीन के संशोधनों के कारण बालों के रंग में गहरा परिवर्तन आता है, जो कभी-कभी लाल रंग के बालों के रूप में प्रकट होता है। उन्होंने बताया कि भारत में लाल बालों वाले लोगों की संख्या बहुत कम है, इसलिए इस जीन का प्रभाव विशेष रूप से उल्लेखनीय है। इस शोध से भारत में आनुवंशिकी और अध्ययन को नई दिशा मिल सकती है, साथ ही त्वचा और बालों से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं को समझने में भी मदद मिलेगी।

इस खोज की महत्ता न केवल विज्ञान जगत के लिए है, बल्कि इससे संबंधित मेडिकल रिसर्च में भी प्रगति होगी। भविष्य में MC1R जीन के अध्ययन से नई दवाएं और उपचार विकसित किए जा सकते हैं जो त्वचा संबंधी रोगों और बालों की समस्याओं को ठीक कर सकेंगी।

CCMB के वैज्ञानिकों ने इस अध्ययन के दौरान विभिन्न भारतीय समुदायों के आनुवंशिक नमूने इकट्ठे किए तथा उनकी जीन संरचना का विश्लेषण किया। इसके अलावा, उन्होंने उच्च तकनीक जीन सिक्वेंसिंग विधियों का इस्तेमाल किया जिससे परिणामों की विश्वसनीयता सुनिश्चित हुई।

आनुवंशिकी के विशेषज्ञों का मानना है कि भारत के जटिल जनजातीय और जातीय समूहों में ऐसे अनोखे आनुवंशिक प्रकार खोजने से हमारे देश की जैव विविधता के साथ-साथ मानव विकास के बारे में महत्वपूर्ण सूचनाएँ मिलती हैं।

यह शोध न केवल राष्ट्रीय स्तर पर, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सराहना प्राप्त कर रहा है जिससे भारतीय वैज्ञानिक समुदाय की प्रतिष्ठा बढ़ी है। आगामी वर्षों में MC1R और अन्य संबंधित जीनों पर और गहन शोध किए जाने की संभावना है।

इस प्रकार, CCMB के शोधकर्ताओं की यह नवीन खोज भारत के रंग-रूप, आनुवंशिकता और स्वास्थ्य विज्ञान के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।

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