IIT-Madras releases 3D atlas of human brainstem

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मद्रास (IIT मद्रास) ने मानव मस्तिष्क तने का एक अनूठा और व्यापक 3डी एटलस जारी किया है। यह एटलस मस्तिष्क के सबसे जटिल और सूक्ष्म हिस्सों में से एक के बारे में शोधकर्ताओं को अभूतपूर्व दृश्य व जानकारी प्रदान करता है। इस तकनीकी उपलब्धि से न्यूरोसाइंस के क्षेत्र में नई संभावनाएं खुली हैं, जो मनुष्य के तंत्रिका तंत्र की बेहतर समझ विकसित करने में मददगार साबित होंगी।

मस्तिष्क तना, जिसे अंग्रेज़ी में Brainstem कहा जाता है, मानव मस्तिष्क का वह हिस्सा है जो मस्तिष्क और मेरुदंड को जोड़ता है। यह श्वास, हृदय गति, और नींद जैसे मूलभूत जीवन क्रियाओं का नियंत्रण करता है। IIT मद्रास के इस 3डी एटलस का मुख्य उद्देश्य इस इलाके की संरचना को अत्यंत विस्तृत और त्रि-आयामी रूप में दिखाना है, जो पहले उपलब्ध मानचित्रों की तुलना में कहीं अधिक स्पष्टता और सटीकता प्रदान करता है।

इस एटलस का निर्माण करने में नवीनतम तकनीकों और इमेजिंग उपकरणों का इस्तेमाल किया गया है। शोध दल ने मस्तिष्क के विभिन्न हिस्सों की माइक्रोस्कोपिक इमेजिंग करके उन्हें डिजिटल मॉडल में बदला, जिससे शोधकर्ताओं को मस्तिष्क तने की जटिल बनावट, उस पर मौजूद न्यूरॉन्स और तंत्रिकाओं की विस्तृत जानकारी मिली।

IIT मद्रास के शोधकर्ता बताते हैं कि इस 3डी एटलस से न केवल न्यूरोसाइंस की रिसर्च में फायदा होगा, बल्कि यह तंत्रिका रोगों के निदान और उपचार में नई दिशा भी प्रदान करेगा। मस्तिष्क से जुड़े कई रोग जैसे पार्किंसंस, स्ट्रोक, और न्यूरोडीजेनेरेटिव बीमारियों को बेहतर समझने के लिए इस तरह के विस्तृत मॉडल अत्यंत आवश्यक हैं।

यह परियोजना न केवल राष्ट्रीय स्तर पर, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी वैज्ञानिक समुदाय के लिए एक महत्वपूर्ण संसाधन साबित होगी। IIT मद्रास ने यह एटलस ओपन एक्सेस के लिए उपलब्ध कराया है, जिससे देश-विदेश के अनुसंधान संस्थान इसे उपयोग कर अपने काम को आगे बढ़ा सकते हैं।

विशेषज्ञ मानते हैं कि आधुनिक चिकित्सा और जैव प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में इस तरह के डिजिटल एटलस से थेरापी, सर्जरी और नया निदान विकसित करने में काफी मदद मिलेगी। साथ ही, यह छात्रों और शोधकर्ताओं के लिए एक दृष्टिगत शिक्षण उपकरण के रूप में भी कार्य करेगा।

इस प्रकार IIT मद्रास द्वारा मानव मस्तिष्क तने का 3डी एटलस तैयार करना शोध क्षेत्र में एक मील का पत्थर माना जा रहा है, जो मस्तिष्क की गूढ़ता को समझने और न्यूरोवैज्ञानिक रोगों के उपचार में क्रांतिकारी बदलाव ला सकता है।

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