El Nino is here and scientists fear it’ll be big, bad and costly with heat, floods, droughts, fires

नई दिल्ली। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि प्राकृतिक रूप से होने वाला एल नीनो चक्र, जो वैश्विक तापमान को बढ़ाता है, इस बार पहले से भी अधिक तीव्र हो सकता है। यह स्थिति दुनिया को पहले से ही प्रभावित कर रहे जीवाश्म ईंधन प्रदूषण के कारण हो रहे वैश्विक तापमान बढ़ने के साथ मिलकर अत्यधिक मौसम की घटनाओं को बढ़ावा दे सकती है।

एल नीनो प्राकृतिक जलवायु का एक चक्र है जो प्रशांत महासागर के तापमान को असामान्य रूप से गर्म कर देता है। इससे मौसम पैटर्न में बदलाव आता है, जैसे कि अधिक गर्मी, लंबी सूखे की स्थितियां, विनाशकारी बाढ़ और जंगलों में आग भड़कना। विशेषज्ञों का कहना है कि जब इस प्राकृतिक प्रक्रिया के साथ मानव गतिविधियों के कारण वैश्विक तापमान में वृद्धि जुड़ जाती है, तो इसके परिणाम बहुत गंभीर हो सकते हैं।

जलवायु वैज्ञानिकों के अनुसार, हाल के वर्षों में बढ़ती मानवजनित जलवायु परिवर्तन की वजह से पृथ्वी पहले से ही रिकॉर्ड तोड़ रही है। एल नीनो के कारण समुद्रों का तापमान और भी ज्यादा बढ़ सकता है, जो वैश्विक मौसम प्रणाली में भारी अस्थिरता लाएगा। इससे न केवल गर्मी की लहरें, सूखा और बाढ़ की घटनाएं ज्यादा प्रबल होंगी, बल्कि इनसे प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को भी भारी आर्थिक और सामाजिक नुकसान झेलना पड़ सकता है।

विशेषज्ञों ने कहा कि एल नीनो घटनाएं समुद्री जीवन, कृषि, जल संसाधन और मानव स्वास्थ्य पर गहरा असर डालती हैं। कई जगहों पर पानी की कमी से फसलें खराब होने का खतरा रहता है, जबकि अन्य जगहों पर अत्यधिक बारिश से बाढ़ का कहर बरपता है। इसके चलते खाद्य सुरक्षा पर भी प्रश्न चिन्ह लग सकता है।

सरकारी और गैर-सरकारी संगठन इस चुनौती से निपटने के लिए पहले से ही तैयारी कर रहे हैं, ताकि आपदा प्रबंधन और राहत कार्य तेजी से किए जा सकें। साथ ही, लोगों को जागरूक करने और पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों को मजबूत बनाने की जरूरत भी बढ़ गई है।

इस स्थिति से बचने के लिए वैश्विक स्तर पर उत्सर्जन को कम करने, जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को सीमित करने और प्रकृति के अनुकूल नीतियां अपनाने की सख्त जरूरत है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सही कदम नहीं उठाए गए, तो एल नीनो की यह नई लहर मानवता के सामने बड़ी चुनौतियां खड़ी कर सकती है।

इसलिए, जलवायु विज्ञान की यह चेतावनी गंभीरता से लेनी होगी ताकि आने वाले समय में होने वाले प्राकृतिक और मानवीय संकट से बेहतर तरीके से निपटा जा सके।

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