अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह के करेन और रांची समुदायों के लिए समुद्र सदियों से जीवन का आधार रहा है। यह समुद्र न केवल उनकी रोज़ी-रोटी का जरिया है, बल्कि अब यह उनके भविष्य और करियर का निर्माण भी कर रहा है। विश्व महासागरीय दिवस 2026 के अवसर पर यह गौर करने की बात है कि कैसे डाइविंग इन समुदायों की जिंदगी में एक नई दिशा और उम्मीद लेकर आई है।
पहले जहां इन समुदायों का समुद्र से जुड़ाव मुख्य रूप से मछली पकड़ने और समुद्री संसाधनों पर निर्भर था, वहीं आज डाइविंग की तकनीक के चलते युवा समुद्र के भीतर नए अवसर खोज रहे हैं। डाइविंग न केवल पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह करेन और रांची समुदायों के युवाओं को रोजगार और स्थिर आय का जरिया भी प्रदान कर रही है।
स्थानीय गैर-सरकारी संगठनों और सरकार की पहल से प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं, जिनके माध्यम से युवा विशेषज्ञ डाइविंग सीख रहे हैं। इससे वे समुद्री पर्यटन उद्योग में सुरक्षित और कुशलतापूर्वक काम कर सकते हैं। इससे उनकी आमदनी बढ़ी है और समृद्धि के नए रास्ते खुले हैं।
डाइविंग से मिलने वाली आजीविका के साथ-साथ इन समुदायों के लिए स्वच्छ और टिकाऊ मकान बनाना भी संभव हो पाया है। पहले झोपड़ियों पर निर्भर कर जीवन यापन करने वाले ये लोग अब कंक्रीट के मजबूत मकान बना रहे हैं, जो न केवल आपदा से सुरक्षित हैं बल्कि जीवन स्तर को भी बेहतर बनाते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, समुद्री पारिस्थितिकी को संरक्षित रखते हुए डाइविंग उद्योग का विकास करना आवश्यक है। पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ाने और सतत विकास के प्रयासों के चलते करेन और रांची समुदाय को न केवल आर्थिक सुरक्षा मिली है, बल्कि सांस्कृतिक और प्राकृतिक विरासत को बचाए रखने का अवसर भी मिला है।
इस प्रकार, अंडमान के करेन और रांची समुदायों के लिए समुद्र ने एक बार फिर जीवन का आधार बनते हुए उन्हें आधुनिक संसाधनों और तकनीकों के साथ जोड़ा है। डाइविंग ने उनके जीवन में सिर्फ फर्क नहीं डाला, बल्कि एक उज्जवल भविष्य की नींव रखी है, जो उनकी आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनेगी। विश्व महासागरीय दिवस पर यह संदेश सभी के लिए एक सीख है कि समुद्र का संरक्षण और उसका समझदारी से उपयोग ही हमारे उत्तराधिकार को सुरक्षित बना सकता है।


















































































































