नई दिल्ली। शतरंज के युवा प्रतिभाशाली ग्रैंडमास्टर आर. प्रग्गनानंधा ने हाल ही में नॉर्वे चेस टूनामेंट में वर्ल्ड चैंपियन मैग्नस कार्लसन को दो बार पराजित कर एक नया इतिहास रचा है। क्लासिकल फॉर्मेट में कार्लसन को हराने वाले प्रग्गनानंधा ने कहा कि यह उपलब्धि उनके लिए विशेष है, लेकिन पूरे खेल में सही समय पर सही निर्णय लेना और परिस्थिति का सही आकलन करना और भी ज्यादा महत्वपूर्ण होता है।
टूनामेंट में प्रग्गनानंधा की जीत को शतरंज जगत में युवा और दबदबे वाले खेल के तौर पर देखा जा रहा है। उन्होंने इस सफलता पर खुशी जताई और कहा कि कार्लसन को हराना एक सम्मान की बात है क्योंकि वे विश्व के शीर्ष खिलाड़ियों में से एक हैं। लेकिन साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी मैच में विजय हासिल करने के लिए सही समय पर चाल चलना और मानसिक मजबूती होना अनिवार्य है।
प्रग्गनानंधा ने मीडिया से बात करते हुए कहा, “कार्लसन को हराना निश्चित ही एक विशेष अनुभव है। मेरा मानना है कि केवल प्रतिध्वनि पर निर्भर रहना सही नहीं होता, बल्कि खेल के हर पल में अपनी रणनीति को सही से लागू करना और समय देखकर निर्णय लेना सबसे महत्वपूर्ण है।”
उन्होंने आगे कहा कि इस टूर्नामेंट में उनकी तैयारी, प्रशिक्षण और अनुभव ने उन्हें कार्लसन जैसे दिग्गज खिलाड़ी के खिलाफ बेहतर प्रदर्शन करने में मदद की। युवा ग्रैंडमास्टर ने उम्मीद जताई कि ये जीत उनके करियर के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगी।
विशेषज्ञों के अनुसार प्रग्गनानंधा की यह सफलता भारतीय शतरंज के लिए गर्व की बात है, क्योंकि यह दिखाती है कि भारतीय युवा खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर किस कदर प्रतिस्पर्धात्मक और मजबूत हैं। इस जीत से भारत में शतरंज के प्रति युवाओं का उत्साह बढ़ा है और यह खेल तेजी से लोकप्रिय हो रहा है।
इस टूर्नामेंट में मिली इस प्रतिक्रिया के बाद विश्व शतरंज जगत की नजरें प्रग्गनानंधा पर और भी अधिक टिक गई हैं, जहां वे आने वाले समय में बड़ी उपलब्धियां हासिल कर सकते हैं। कार्लसन को दो बार हराने का रिकॉर्ड उन्हें एक विशिष्ट स्थान प्रदान करता है और यह दर्शाता है कि आने वाले समय में प्रग्गनानंधा को गंभीर ध्यान और प्रतिस्पर्धा का सामना करना होगा।
प्रग्गनानंधा का यह सकारात्मक प्रदर्शन भारतीय शतरंज के इतिहास में एक नई प्रेरणा के रूप में उभरा है, जो युवा खिलाड़ियों को भी बड़ी सफलता पाने के लिए प्रेरित करेगा। संसार के शीर्ष खिलाड़ियों के बीच उनकी यह उपलब्धि निश्चित रूप से भारत के शतरंज प्रेमी समुदाय के लिए गर्व का विषय है।








































































































