Is a heatwave really a wave of heat?

भारत में गर्मी का मौसम हर साल एक बार आता है, लेकिन जब तापमान सामान्य से कहीं अधिक बढ़ जाता है, तो उसे हीटवेव यानी “गर्मी की लहर” कहा जाता है। हालांकि आम जनता में यह धारणा है कि हीटवेव का मतलब है हवा में गर्मी की कोई “लहर” जो तेजी से फैलती है, परंतु वैज्ञानिक दृष्टि से यह सच नहीं है।

हीटवेव दरअसल एक स्थायी उच्च दबाव प्रणाली की वजह से होती है, जिससे लंबे समय तक क्षेत्र में तापमान सामान्य से बहुत अधिक रहता है। इस दौरान वातावरण में एक स्थिर स्थिति बनती है जिसके कारण गर्मी लगातार बनी रहती है और ठंडक आने के बजाय तापमान दिनों-दिन बढ़ता रहता है।

विशेषज्ञ बताते हैं कि हीटवेव कोई तैरती हुई गर्मी की ‘लहर’ नहीं होती, बल्कि यह तापमान के बढ़े हुए लंबे समय तक जारी रहने का एक निर्माण होता है। उच्च दबाव की वजह से हवा ऊपर की ओर उठती है, जिससे बादल बनने की प्रक्रिया रुकती है और सूरज की गर्मी सीधे धरती तक पहुँचती रहती है। इसके कारण क्षेत्र में तापमान अचानक बढ़ जाता है और मौसम बहुते गर्म हो जाता है।

भारत के विभिन्न हिस्सों में विशेषत: मई से जून के महीनों तक हीटवेव अधिक होने की संभावना रहती है, जब दक्षिण-पश्चिम मानसून के आने से पहले यह स्थिर उच्च दबाव क्षेत्र बन जाता है। इस दौरान लोगों को गर्मी से बचाव के लिए अतिरिक्त सावधानी रखनी पड़ती है एवं धूप में बाहर निकलने से बचना चाहिए।

सरकार और मौसम विभाग भी इस बात का विशेष ध्यान रखते हैं कि हीटवेव के दौरान समय पर आगाह कर जनता को सुरक्षित रखा जा सके। उचित जलपान, हल्के वस्त्र पहनना, और धीमी गति से काम करना इस मौसम में जरूरी उपाय माने जाते हैं।

इस प्रकार, हीटवेव एक ‘लहर’ नहीं बल्कि एक स्थायी मौसमीय स्थिति है, जिसमें तापमान काफी समय तक सामान्य से ऊंचा बना रहता है। इस समझ को लेकर जागरूकता बढ़ाने से असल तथ्य और मिथकों में स्पष्टता आती है।

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