डिजिटल मीडिया, 27 अप्रैल 2024 – अन्ना मूवी म Producers And Actors Association (AMMA) के पूर्व संयुक्त सचिव अन्सीबा हसन ने विषम परिस्थितियों के बीच अभिनेता लक्ष्मिप्रिया और राजपत्रित महिला पुलिस अधिकारी रेशमा के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के लिए अदालत का सहारा लिया है। अन्सीबा ने अपने शिकायती पत्र में आरोप लगाया है कि लक्ष्मिप्रिया ने उन पर झूठा मुकदमा दर्ज कराया है जबकि त्रिपुनिथूरा महिला पुलिस सेल की उप-निरीक्षक रेशमा ने उन्हें झूठे आरोपों की जांच के नाम पर उत्पीड़न और गैरकानूनी हिरासत में रखा।
अन्सीबा हसन, जो AMMA की पूर्व संयुक्त सचिव रह चुकी हैं, ने अपनी शिकायत में कहा है कि इस पूरे विवाद की जड़ में उनके और अभिनेता लक्ष्मिप्रिया के बीच असहमति है। उन्होंने बताया कि लक्ष्मिप्रिया ने उनके खिलाफ सांठगांठ कर झूठे आरोप लगाकर पुलिस कार्रवाई की मांग की, जो न केवल उनके करियर बल्कि निजी प्रतिष्ठा को भी गंभीर नुकसान पहुंचा रही है।
इसके साथ ही, अन्सीबा ने त्रिपुनिथूरा महिला पुलिस सेल की उप-निरीक्षक रेशमा के रवैये को भी कठोरता से निंदित किया है। उनका आरोप है कि रेशमा ने बिना किसी ठोस साक्ष्य या उचित प्रक्रिया का पालन किए उन्हें कई घंटों तक जबरन हिरासत में रखा और मानसिक प्रताड़ना दी, जिससे वे अत्यधिक तनावग्रस्त और असहाय महसूस कर रही हैं।
वहीं, AMMA के उपाध्यक्ष लक्ष्मिप्रिया की ओर से इस तथ्य को खारिज किया गया है और इसे राजनीतिक रूप से प्रेरित मानने की कोशिश की गई है। उनके वकीलों का कहना है कि शिकायत पूरी तरह से निराधार है और अदालत में इस मामले को सही तरीके से सुलझाया जाएगा।
इस प्रकरण ने फिल्म इंडस्ट्री के एक बड़े विवाद को जन्म दिया है, जहां कई कलाकार और मीडिया लगातार इस मामले पर नजर बनाए हुए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के मामले कला जगत की छवि को प्रभावित कर सकते हैं और असल मायने में न्याय मिलने तक संदिग्ध स्थिति बनी रह सकती है।
अन्सीबा हसन की यह शिकायत केवल एक विवाद नहीं है, बल्कि यह संस्थागत जवाबदेही और महिलाओं के अधिकारों के प्रति मतदान का मापदंड भी है। अदालत में इस मामले की सुनवाई जल्द ही होने वाली है और यह देखने वाली बात होगी कि न्याय व्यवस्था इस मामले में तय दक्षता और निष्पक्षता दिखाती है या नहीं।
अन्त में, इस मामले ने AMMA सहित फिल्म जगत में व्याप्त पेचीदगियों और सत्ता संघर्षों को भी उजागर किया है, जहाँ कलाकारों और अधिकारपतियों के बीच कई बार विवाद निकलकर सामाजिक और न्यायिक मुद्दों में तब्दील हो जाते हैं।
फिलहाल मामला न्यायालय के निर्णायक आदेश का इंतजार कर रहा है, जिससे स्पष्ट हो सकेगा कि किस पक्ष की दलीलें बलवान हैं और वास्तविक दोषी कौन है।


























































































































