नई दिल्ली, 21 जून 2024। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर तीन युवा शास्त्रीय नर्तकाओं ने अपने कला के शारीरिक पहलू पर प्रकाश डाला और बताया कि कैसे शारीरिक फिटनेस उनके प्रदर्शन की भावनात्मक अभिव्यक्ति को प्रभावित करती है। शास्त्रीय नृत्य, जो नाजुकता और सटीकता का अनूठा संगम है, में न केवल तकनीकी दक्षता आवश्यक है बल्कि शारीरिक ताकत और सहनशक्ति भी अनिवार्य भूमिका निभाती है।
तृतीया जोशी, एक प्रशिक्षित कथक नर्तकी, कहती हैं कि नृत्य का अभ्यास शारीरिक फिटनेस को बेहतर बनाता है और इससे मानसिक एकाग्रता भी बढ़ती है। “हमारे हर कदम, हर मुद्रा का संबंध सीधे हमारे शरीर और उसके नियंत्रण से होता है। अगर हमारा शरीर मजबूत नहीं होगा, तो भावनाओं की वह गहराई और सुंदरता नृत्य में प्रकट नहीं हो पाएगी,” उन्होंने कहा।
इसी प्रकार, गगनदीप कौर, जो परंपरागत भरतनाट्यम में प्रशिक्षित हैं, ने बताया कि योग और शारीरिक व्यायाम उनके नियमित अभ्यास का हिस्सा हैं। “योग हमारे शरीर के लचीलापन बढ़ाता है, जिससे सिर का संतुलन और अंगों की गतिशीलता बढ़ती है। ये सभी गुण हमारी भावनात्मक अभिव्यक्ति को प्रभावी बनाते हैं,” उन्होंने बताया।
अंत में, युवा मंजू राव जो ओडिसी में सक्रिय हैं, कहती हैं कि नृत्य न केवल एक कला है, बल्कि यह शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य का एक माध्यम भी है। “जब शरीर स्वस्थ और मन शांत होता है, तब ही हम अपने भावों को सही तरीके से दर्शा पाते हैं। शास्त्रीय नृत्य में भावों का उत्थान और पतन दोनों शारीरिक परिश्रम से जुड़ा है,” उन्होंने साझा किया।
विशेषज्ञों का मानना है कि नृत्य और योग दोनों का संयोजन कलाकारों को न केवल शारीरिक मजबूती देता है, बल्कि मानसिक संतुलन भी प्रदान करता है। इसलिए, फिटनेस को शास्त्रीय नृत्य की आत्मा माना जाता है, जो कलाकार को भावनाओं की गहराई तक पहुंचने में सहायक होता है।
अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर यह विचार फलक पर आया कि नियमित योग और व्यायाम नृत्य के शारीरिक पहलुओं को मजबूत करने और प्रदर्शन को उत्कृष्ट बनाने में कैसे सहायक हैं। कुल मिलाकर, फिटनेस न केवल नृत्य की तकनीकी दक्षता बढ़ाती है, बल्कि इसके माध्यम से कलाकार अपनी आंतरिक भावनाओं को सहजता और सजीवता से दर्शा पाते हैं।





































































































































