भारत की युवा शतरंज खिलाड़ी दिव्या देशमुख ने इतिहास रच दिया है। सोमवार को उन्होंने FIDE महिला शतरंज विश्व कप के फाइनल में अनुभवी खिलाड़ी कोनेरू हम्पी को हराकर न केवल टूर्नामेंट जीता, बल्कि भारत की 88वीं ग्रैंडमास्टर (GM) भी बन गईं। ये मुकाबला काफी रोमांचक रहा और टाई-ब्रेक तक गया, जहाँ दिव्या ने 1.5-0.5 से जीत दर्ज की।
भारत लौटने के बाद दिव्या ने अपनी इस बड़ी सफलता को अपने पहले शतरंज कोच राहुल जोशी को समर्पित किया। राहुल जोशी महाराष्ट्र के एक जाने-माने शतरंज प्रशिक्षक थे और 2020 में मात्र 40 साल की उम्र में उनका निधन हो गया था। दिव्या ने भावुक होकर कहा, “मेरे कोच हमेशा चाहते थे कि मैं ग्रैंडमास्टर बनूं। यह खिताब मैं उन्हें समर्पित करती हूँ।”
दिव्या ने हाल ही में FIDE के साथ बातचीत में बताया कि इस टूर्नामेंट में उनकी सफलता के पीछे एक मजबूत टीम ने काम किया। उन्होंने कहा कि हंगरी के ग्रैंडमास्टर कसाबा बालोग ने उनकी तैयारी में बहुत मदद की। बालोग ने न सिर्फ देर रात तक दिव्या के लिए काम किया बल्कि खुद नींद तक नहीं ली, ताकि दिव्या को हर मुकाबले के लिए बेहतर रणनीति मिल सके। दिव्या ने कहा, “उनकी मेहनत मेरे लिए बहुत मायने रखती है।”
इसके अलावा, भारतीय ग्रैंडमास्टर अभिमन्यु पुराणिक ने भी दिव्या का उत्साह बनाए रखा और उन्हें मानसिक रूप से मजबूत किया। अभिमन्यु मुंबई के रहने वाले हैं और 2018 में विश्व जूनियर शतरंज चैंपियनशिप में उपविजेता रह चुके हैं।
दिव्या देशमुख पहले ही विश्व जूनियर, एशियाई और विश्व युवा शतरंज चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीत चुकी हैं। उनकी इस शानदार जीत ने एक बार फिर दुनिया को दिखा दिया कि भारत शतरंज की दुनिया में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
अपनी जीत को लेकर दिव्या ने कहा, “मुझे अब भी यकीन नहीं हो रहा कि मैं ग्रैंडमास्टर बन गई हूं। टूर्नामेंट से पहले तक मेरे पास एक भी नॉर्म नहीं था। मैं सोचती रहती थी कि पहला नॉर्म कब आएगा, और अब अचानक मैं ग्रैंडमास्टर बन गई हूं। शायद ये किस्मत थी।”
इस जीत ने न केवल दिव्या को नई पहचान दी है, बल्कि भारत के युवाओं को भी एक नया प्रेरणा स्रोत दिया है।











































































